पुलिस ने बेगमपुर के हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल से 5 शिशुओं को मुक्त कराया, संचालिका समेत 8 लोग गिरफ्तार।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस ने नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल पर छापा मारकर इस अवैध नेटवर्क के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पांच नवजात शिशुओं को सकुशल बचा लिया गया है, जिन्हें फिलहाल शेल्टर होम में रखा गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों से गरीब परिवारों को प्रलोभन देकर नवजात बच्चों को खरीदता था और फिर दिल्ली में लाकर उन्हें भारी रकम में बेच दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे तस्करी नेटवर्क का संचालन एक सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें सप्लायर से लेकर बिचौलिए और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल थे। गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी को बताया जा रहा है, जो पेशे से चिकित्सक हैं। उनके साथ इस धंधे में शामिल अन्य आरोपियों में ज्योति उर्फ कमलेश, शालू, ललित, प्रतिभा, विपिन, ओमवती और राजस्थान के उदयपुर निवासी साएबा भाई घमर उर्फ कालिया को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इन लोगों के पास से बरामद बच्चों के खरीदारों की भी पहचान कर ली है, जिनमें मुकेश, रीमा पाल, सन्नी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सरिका शामिल हैं।

तस्करी के इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब सेंट्रल जिला पुलिस को पहाड़गंज क्षेत्र से एक महिला की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में गुप्त सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और एक नकली ग्राहक तैयार कर गिरोह तक पहुंचने की योजना बनाई। पुलिस द्वारा बिछाए गए जाल में तस्कर फंसा गए, जिसके बाद की गई पूछताछ और छापेमारी से अस्पताल में चल रहे फर्जीवाड़े का पता चला। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी गरीब परिवारों से 10 से 15 हजार रुपये में बच्चों को खरीदते थे और फिर उन्हें अस्पताल में लाकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर 5 से 10 लाख रुपये तक में निसंतान दंपतियों को बेच देते थे।

बचाए गए बच्चों में चार आदिवासी समुदाय के हैं और एक दिल्ली का रहने वाला है, जिनकी उम्र कुछ दिनों से लेकर चार माह तक है। आरोपियों द्वारा पूछताछ में खुलासा किया गया कि वे इन बच्चों को जुड़वा बताकर भी अधिक कीमत पर बेचते थे। अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी, जिनके पास बीएससी नर्सिंग और एमएससी क्रिटिकल केयर जैसी उच्च डिग्रियां हैं, इस पूरे नेटवर्क में मेडिकल और दस्तावेजी सहायता प्रदान करती थीं। वर्तमान में पुलिस बरामद बच्चों के वास्तविक परिजनों की तलाश कर रही है और इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों को खंगालने का कार्य जारी है। इस ऑपरेशन को एसीपी ऑपरेशंस पदम सिंह राणा की देखरेख में इंस्पेक्टर संदीप यादव की टीम ने अंजाम दिया है, जो मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।


Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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