देश की रक्षा व्यवस्था से जुड़े सबसे संवेदनशील तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक सेवारत सैन्य अधिकारी, लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को कथित रिश्वत और भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई न केवल सैन्य प्रतिष्ठानों में व्याप्त भ्रष्टाचार की आशंकाओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जांच एजेंसियां अब उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हट रही हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा रक्षा उत्पादन विभाग में उप-योजना अधिकारी (डिप्टी प्लानिंग ऑफिसर) के पद पर तैनात थे। सीबीआई के अनुसार, उन्हें एक निजी व्यक्ति विनोद कुमार के साथ हिरासत में लिया गया, जो इस कथित घूसखोरी नेटवर्क में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामला रक्षा से जुड़े ठेकों और व्यावसायिक सौदों में अनुचित लाभ पहुंचाने से जुड़ा हुआ है।

जांच एजेंसी को खुफिया सूचनाएं मिली थीं कि रक्षा सौदों में प्रभाव डालने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तहत रिश्वत का लेन-देन किया जा रहा है। इसी आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और कार्रवाई को अंजाम दिया। आरोप है कि 18 दिसंबर को लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा को रिश्वत की एक किस्त सौंपी गई, जिसके तुरंत बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।

इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली, बेंगलुरु, जम्मू और राजस्थान के श्रीगंगानगर सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इन तलाशी अभियानों के दौरान जांच एजेंसी को भारी मात्रा में नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे। अधिकारियों के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा से जुड़े परिसरों से दो करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की गई, जिसने इस मामले की गंभीरता को और गहरा कर दिया है।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई को आगे की पूछताछ और साक्ष्य एकत्र करने के लिए समय दिया है। इस दौरान एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस कथित भ्रष्टाचार में और कौन-कौन से अधिकारी, कारोबारी या विदेशी संस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

सीबीआई का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और ठेका प्रक्रिया के व्यापक नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना के लिए यह मामला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल संस्थागत साख प्रभावित होती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णयों की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। सीबीआई की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश देती है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी स्तर पर हो, कानून की पकड़ से बाहर नहीं रहेगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story