जबलपुर के समीप नर्मदा नदी पर स्थित प्रसिद्ध बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज हादसे ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 13 जिंदगियों को लील लेने वाले इस हादसे के बाद, डूबे हुए क्रूज को बाहर निकालकर उसे टुकड़ों में काटे जाने की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे में बचे पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि तकनीकी जांच पूरी होने से पहले ही साक्ष्यों के साथ अनजाने में या जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है। इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और जांच की निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

घटनाक्रम के अनुसार, बरगी बांध में डूबे हुए क्रूज को जब बाहर निकाला गया, तो उसके बाद तकनीकी टीमों को इसके इंजन और पूरी बॉडी लाइन का गहन निरीक्षण करना था। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कटर मशीनों के जरिए क्रूज को हिस्सों में बांट दिया गया। इस पर हादसे में बाल-बाल बचे अधिवक्ता रोशन आनंद ने कड़ी आपत्ति जताई है। आनंद उस समय अपने परिवार के 9 सदस्यों के साथ क्रूज पर सवार थे। उनका तर्क है कि क्रूज लगभग 20 साल पुराना था, जिसकी बॉडी लाइन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच होना अनिवार्य था। क्रूज को काट दिए जाने के बाद अब यह पता लगाना असंभव है कि हादसे के समय बॉडी में कोई तकनीकी खामी या छेद तो नहीं था, जिसने जलसमाधि का मार्ग प्रशस्त किया।

प्रशासनिक पक्ष की ओर से सीएसपी बरगी अंजुल अयंक मिश्रा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने यह सुनिश्चित करने के लिए क्रूज को काटा था कि उसके अंदर कोई और शव या व्यक्ति फंसा न रह जाए। उन्होंने बताया कि इंजन को अलग कर तकनीकी जांच के लिए भेज दिया गया है। गौरतलब है कि इस हृदयविदारक हादसे में 13 व्यक्तियों की असामयिक मृत्यु हुई थी, जिनमें आठ महिलाएं, चार पुरुष और एक मासूम बच्चा शामिल था। बचाव अभियान के दौरान 28 व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली थी, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि क्रूज की संरचना को नष्ट करने से भविष्य की न्यायिक जांच कमजोर हो सकती है।

हादसे की त्रासदी का दूसरा पहलू तब सामने आया जब मृतकों के शवों को उनके गृह राज्य तमिलनाडु भेजने की तैयारी की गई। जबलपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज और उनके परिजनों के शव गर्मी और समय बीतने के कारण डीकंपोज (गलने) लगे थे। बदबू इतनी तीव्र थी कि विमान के पायलट ने शवों को ले जाने से स्पष्ट इंकार कर दिया। जिला प्रशासन के अधिकारियों को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अंततः, शवों पर विशेष स्प्रे के छिड़काव और लंबी समझाइश के बाद ही विमान ने त्रिची (तमिलनाडु) के लिए उड़ान भरी।

यह घटना न केवल सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है, बल्कि आपदा के बाद की जांच और प्रोटोकॉल के पालन में रही खामियों को भी दर्शाती है। यदि 20 साल पुराने इस क्रूज के सुरक्षा संसाधनों और फिटनेस की समय रहते जांच की गई होती, तो शायद 13 परिवारों के चिराग नहीं बुझते। अब बॉडी लाइन की जांच संभव न होने के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीदों पर धुंध छाने लगी है। यह अनिवार्य है कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता बरते और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करे जिन्होंने महत्वपूर्ण साक्ष्य को खंडित करने का निर्णय लिया।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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