अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की अधूरी आस और 'VIP' की तलाश में CBI जांच की उठती गूंज
अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'VIP' के नाम के खुलासे और CBI जांच की मांग ने उत्तराखंड में फिर से विरोध की लहर पैदा कर दी है। माता-पिता ने मुख्यमंत्री धामी से मिलकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की अपील की है। क्या पुलकित आर्या की सजा के बाद अब उजागर होगा वो असली चेहरा? पढ़ें पूरी खबर।

देहरादून: उत्तराखंड की शांत वादियों को झकझोर देने वाले बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की आग एक बार फिर सुलग उठी है। पौड़ी गढ़वाल की बेटी अंकिता के माता-पिता द्वारा राजधानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग ने इस ठंडे पड़ते मामले में नई जान फूंक दी है। यह केवल एक कानूनी मांग नहीं, बल्कि देवभूमि की उस बेटी के लिए न्याय की पुकार है, जिसकी गरिमा की रक्षा करते हुए उसकी जान ले ली गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि साल 2022 की है, जब ऋषिकेश के पास यमकेश्वर स्थित 'वनंतरा रिसॉर्ट' में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच के अनुसार, रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्या और उसके दो सहयोगियों—सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—ने अंकिता पर एक 'वीआईपी' अतिथि को 'विशेष सेवा' देने का दबाव बनाया था। जब अंकिता ने अपने स्वाभिमान से समझौता करने से इनकार कर दिया, तो उसे चिल्ला नहर में धकेल कर मौत के घाट उतार दिया गया।
हालांकि, साल 2025 में कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत की न्यायाधीश रीना नेगी ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्या, जो कि निष्कासित भाजपा नेता विनोद आर्या का पुत्र है, के साथ अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन, अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी के मन में आज भी एक सवाल फांस की तरह चुभ रहा है—वह 'VIP' कौन था?
हाल ही में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के कथित वायरल ऑडियो ने इस मामले में राजनीतिक और सामाजिक भूचाल ला दिया है। इस ऑडियो में एक प्रभावशाली नाम का जिक्र होने के बाद परिवार और जनता का विश्वास वर्तमान एसआईटी (SIT) जांच से डगमगाने लगा है। अंकिता के माता-पिता का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासन उस रसूखदार 'VIP' को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिसके कारण उनकी बेटी की जान गई।
इसी मांग को लेकर देहरादून के परेड ग्राउंड से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक प्रदर्शनों का दौर जारी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और गणेश गोदियाल जैसे दिग्गज नेताओं ने भी इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने भी साफ किया कि जब तक उस 'VIP' चेहरे का पर्दाफाश नहीं होता, अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार को आश्वासन दिया है कि उनकी सरकार न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और साक्ष्यों की प्रामाणिकता जांचने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। बावजूद इसके, प्रदेश में आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अंकिता भंडारी का मामला अब केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं, बल्कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता के गलियारों में छिपे अपराधियों के खिलाफ एक जन-आंदोलन बन चुका है। अब देखना यह है कि क्या सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी CBI को सौंपती है या 'वीआईपी' का राज राज ही रह जाएगा।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
