पुलिस छापे में कमरे से मिले संदिग्ध हथियार ; जानिए कौन है शैवाज, जिसने AMU को बनाया था ठिकाना
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हॉस्टल में पुलिस छापे में अवैध कारतूस, नकली नोट, मोबाइल और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए। फायरिंग मामले से जुड़े इस केस में मुख्य आरोपी शैवाज फरार है। पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक हॉस्टल में बुधवार शाम उस वक्त सनसनी फैल गई, जब पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद की। यह कार्रवाई हाल ही में अलीगढ़ के सिविल लाइंस क्षेत्र में हुई फायरिंग की घटना के सिलसिले में की गई, जिसने पूरे इलाके में पहले ही तनाव का माहौल बना रखा था। छापेमारी के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए बल्कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर चल रही संदिग्ध गतिविधियों की गंभीरता भी उजागर कर दी।
पुलिस के अनुसार, सिविल लाइंस और क्वार्सी थानों की संयुक्त टीम ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर सर जियाउद्दीन हॉल के एक कमरे में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कमरे से विभिन्न बोर के हथियारों के कारतूस बरामद हुए, जिनमें 32 बोर पिस्टल की गोलियां और 12 बोर के चार कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा नकली मुद्रा, करीब आठ मोबाइल फोन, एक खाली मैगजीन कवर और कई संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए गए। यह बरामदगी इस बात की ओर संकेत करती है कि कमरे का इस्तेमाल किसी संगठित आपराधिक गतिविधि के लिए किया जा रहा था।
एएमयू के प्रॉक्टर प्रोफेसर नदीम खान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कमरा शैवाज नामक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया था। आरोप है कि उसने कमरे के वास्तविक आवंटित छात्रों को जबरन बाहर कर दिया था और पिछले कई महीनों से वहां रह रहा था। जांच में यह भी पता चला है कि शैवाज पहले विश्वविद्यालय में किसी कोर्स में नामांकित था, लेकिन वह गैर-आवासीय छात्र था, ऐसे में उसे हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई का संबंध 7 अप्रैल को क्वार्सी थाने में दर्ज फायरिंग मामले से है। इसी कड़ी में तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें शैवाज का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा। हालांकि, मुख्य आरोपी शैवाज उर्फ शाहबाज फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
कानूनी कार्रवाई के तहत इस मामले में कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। क्वार्सी थाने में दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2) और 191(3) (दंगा और घातक हथियारों के साथ दंगा), 190 (अवैध जमावड़ा), 109(1) (हत्या का प्रयास) और 3(5) (सामूहिक मंशा) शामिल हैं। वहीं सिविल लाइंस थाने में बरामदगी के आधार पर धारा 179 (जाली दस्तावेजों का कब्जा), 180 (जाली दस्तावेजों का उपयोग), 318(4) (धोखाधड़ी), 338 (जीवन के लिए खतरनाक कार्य से गंभीर चोट) और 336(3) (जीवन को खतरे में डालने वाला कार्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है, साथ ही आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के भीतर इस तरह की आपराधिक गतिविधियों का सामने आना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर अब और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पुलिस अब इस मामले की तह तक जाकर यह पता लगाने में जुटी है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
