उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-91 पर जुलाई 2016 की रात ने न केवल एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी, बल्कि पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की यात्रा उस रात धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए थी, लेकिन उनकी राह में खड़ी हुई क्रूरता ने उन्हें अकल्पनीय त्रासदी में धकेल दिया।


29 और 30 जुलाई 2016 की मध्यरात्रि के करीब, परिवार का वाहन अचानक किसी भारी वस्तु से टकरा गया और रुक गया। जैसे ही परिवार के सदस्य वाहन से उतरे, छह हथियारबंद अपराधियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। पुरुष सदस्यों को रस्सियों से बांधकर पीटा गया और सड़क पर औंधे मुंह लेटने को मजबूर किया गया। इसके बाद आरोपियों ने मां और उसकी 14 वर्षीय बेटी को पास के खेतों में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। अपराधियों ने इस क्रूरता के साथ परिवार से नकदी और कीमती सामान लूटकर अंधेरे में भाग लिया।

घटना की भयावहता और राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई वारदात ने महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगे और कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया। जांच एजेंसी ने अपराध को अपहरण, डकैती, सामूहिक दुष्कर्म और नाबालिग से जुड़े कानूनों के तहत दर्ज किया। जांच के दौरान कई गवाहों के बयान लिए गए और साक्ष्यों की बारीकी से जांच की गई। मुकदमे की सुनवाई कई वर्षों तक चली, जिससे यह मामला न्याय प्रक्रिया की धीमी गति और जटिलताओं का प्रतीक बन गया।


लगभग नौ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, दिसंबर 2025 में बुलंदशहर की अदालत ने पांच दोषियों को मां और बेटी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध की क्रूरता और अमानवीयता को ध्यान में रखते हुए इसे समाज में कठोर संदेश देने वाला मामला बताया। यह घटना न केवल पीड़ित परिवार के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है, बल्कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा, न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली और पुलिस जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।

पीड़ित परिवार को मानसिक आघात, सामाजिक असुरक्षा और बार-बार ठिकाना बदलने की मजबूरी का सामना करना पड़ा। यह मामला न्याय की लंबी प्रक्रिया, पीड़ितों की सहनशीलता और समाज में महिलाओं की सुरक्षा की आवश्यकता का प्रतीक बन गया है। बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप केस यह याद दिलाता है कि जब तक महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं समाज की संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था की वास्तविकता को चुनौती देती रहेंगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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