लखनऊ/उत्तर प्रदेश: डिजिटल युग के इस दौर में सोशल मीडिया जहाँ लोगों को जोड़ने का माध्यम बना है, वहीं शातिर अपराधी इसे अपनी शिकारगाह की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं। सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरती का जाल बिछाकर मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने वाली 'ब्लैकमेलिंग क्वीन' अंशिका पुलिस की गिरफ्त में है। इस शातिर महिला ने एक या दो नहीं, बल्कि 150 से अधिक लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उनसे लाखों की उगाही की है।

हनीट्रैप का खौफनाक खेल: कैसे बुना जाता था साजिश का ताना-बाना

अंशिका के काम करने का तरीका किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर सक्रिय रहती थी। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:

  • दोस्ती की शुरुआत: वह सबसे पहले संपन्न और रसूखदार पुरुषों को चुनती थी और उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर बातचीत शुरू करती थी।
  • मायाजाल में फंसाना: मीठी बातों और अपनी तस्वीरों के जरिए वह सामने वाले का भरोसा जीतती थी और धीरे-धीरे उन्हें अंतरंग बातें करने के लिए उकसाती थी।
  • अश्लील वीडियो की रिकॉर्डिंग: जब शिकार पूरी तरह उसके वश में आ जाता था, तब वह वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन रिकॉर्डिंग या अन्य गुप्त तरीकों से अश्लील वीडियो तैयार कर लेती थी।
  • ब्लैकमेलिंग का दौर: वीडियो हाथ में आते ही अंशिका का असली चेहरा सामने आता था। वह उन वीडियो को सार्वजनिक करने या परिवार को भेजने की धमकी देकर भारी भरकम रकम की मांग करने लगती थी।

150 शिकार और करोड़ों का साम्राज्य

जांच अधिकारियों के अनुसार, अंशिका के मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड्स से यह संकेत मिले हैं कि उसने अब तक लगभग 150 लोगों को अपना दीवाना बनाकर उन्हें लूटा है। बदनामी के डर से इनमें से अधिकांश लोग सामने आने से बचते रहे, जिसका फायदा उठाकर अंशिका का हौसला बढ़ता गया। उसने इस ब्लैकमेलिंग के धंधे से न केवल विलासितापूर्ण जीवनशैली अपनाई, बल्कि कई बेगुनाह लोगों को मानसिक अवसाद की कगार पर पहुंचा दिया।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की सक्रियता

इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब एक पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जाल बिछाकर अंशिका को गिरफ्तार किया।

  • धाराएं: पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
  • डिजिटल साक्ष्य: पुलिस ने उसके पास से कई स्मार्टफोन, सिम कार्ड और आपत्तिजनक वीडियो फुटेज बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
  • गिरोह की जांच: पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस काली कमाई के पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा था या अंशिका अकेले ही इस पूरे साम्राज्य को चला रही थी।

डिजिटल सुरक्षा ही बचाव है

अंशिका की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करने के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि आभासी दुनिया में दिख रही हर चमक असलियत नहीं होती। 'ब्लैकमेलिंग क्वीन' का अंजाम यह संदेश देता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन नागरिकों की सतर्कता ही उन्हें ऐसे हनीट्रैप से बचा सकती है।

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