वृंदावन स्थित वात्सल्यग्राम में आयोजित नेत्र शिविर के समापन समारोह में पूज्य साध्वी ऋतंभरा ने जीवन के कठिन क्षणों में सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने कहा, "जब अपनों का बिछोह होता है तो बहुत पीड़ा होती है, परिवार के एक सदस्य का जाना पूरे परिवार की शक्ति का चले जाना जैसा होता है, लेकिन जब दुःख के समय दूसरों को सुख देने का भाव जाग्रत होना ही शक्ति का श्रृंगारित स्वरुप है।"

सेवा की अनूठी पहल

उल्लेखनीय है कि इस शिविर का आयोजन मुंबई निवासी रामपाल गुप्ता ने अपनी दिवंगत पत्नी सुमिता की स्मृति में किया था। इस नैत्र शिविर में मुंबई के डॉ. श्याम अग्रवाल के नेतृत्व में उनके सहयोगी नेत्र चिकित्सकों ने 304 लोगों की आँखों की मुफ्त सर्जरी कर उन्हें दवाईयाँ, चश्मा आदि भी प्रदान किये। ये वो ‘साध्वी ऋतुंभरा’ नहीं, ये ‘दीदी माँ’ है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘ज़ी’ मीडिया के प्रमुख डॉ. सुभाष चन्द्रा थे और इस अवसर पर श्रीमती सुशीला गोयल भी उपस्थित थी।

राष्ट्रवाद और सत्य का संकल्प

दीदी माँ ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि इस आई कैंप में जिस तरह से साधनहीन मरीजों की आँखों का ऑप्रेशन कर उनके जीवन को रोशनी दी जाती है उससे हम आश्वस्त हैं कि सेवा की ये धारा निरंतर बहती रहेगी। डॉ. सुभाष चन्द्रा की उपस्थिति को रेखांकित करते हुए दीदी माँ ने कहा कि आज के दौर का राक्षस में देश में चलाया जा रहा घृणित नैरेटिव या विमर्श है, ऐसे में डॉ. सुभाष चन्द्रा ने ‘ज़ी’ टीवी और ‘ज़ी’ मीडिया के माध्यम से राष्टरवाद, संस्कृति और जीवन मूल्यों को पहचान देने का बीड़ा उठाया है, वह उनके साहस और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। दीदी माँ ने कहा कि जब विदेशी मीडिया और कुसंस्कृति के माध्यम से भारत की मर्यादा का चीरहरण हो रहा था ऐसे समय में सुभाष जी ने राष्ट्रवाद की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि "सत्य की कीमत चुकाना पड़ती है और सुभाष जी ने इसकी कभी परवाह नहीं की।"

Pratahkal Bureau

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