एक दशक में बदला देश का सामाजिक ढांचा; लिंग अनुपात और शिक्षा में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान ने रचा इतिहास। वर्ष 2014 से 2024 के बीच राष्ट्रीय लिंग अनुपात 918 से बढ़कर 929 हुआ और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुंचा। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने साझा किए खुशहाल भारत के आंकड़े। जानिए कैसे मिशन शक्ति के माध्यम से बदल रही है बेटियों की दुनिया और सामाजिक नजरिया।

Increase in Sex Ratio at Birth from 918 to 929 : भारत की बदलती सामाजिक तस्वीर और लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ी सफलता सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों ने यह प्रमाणित किया है कि बीते एक दशक में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सशक्त राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्टों से स्पष्ट है कि देश में न केवल जन्म के समय बेटियों की संख्या बढ़ी है, बल्कि स्कूलों में उनकी भागीदारी में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
लिंग अनुपात में सुखद सुधार: आंगन में बढ़ीं खुशियां
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) की रिपोर्ट के अनुसार, जन्म के समय लिंग अनुपात (SRB) में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- तुलनात्मक आंकड़ा: वर्ष 2014-15 में प्रति 1,000 लड़कों पर जन्म लेने वाली लड़कियों की संख्या 918 थी।
- वर्तमान स्थिति: वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 929 तक पहुंच गया है।
यह प्रगति दर्शाती है कि कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियानों और कानूनी सख्ती का असर अब धरातल पर दिखने लगा है।
शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की ऊंची उड़ान :
सिर्फ जन्म दर ही नहीं, बल्कि शिक्षा के मंदिर में भी लड़कियां अपनी जगह मजबूत कर रही हैं। एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (UDISE) के आंकड़ों ने माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के नामांकन में सकारात्मक बदलाव की पुष्टि की है।
- नामांकन दर: माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (GER) जो 2014-15 में 75.51 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर 80.2 प्रतिशत हो गया है।
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा में इन आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि कैसे सरकार की एकीकृत नीतियों ने लड़कियों के स्कूल छोड़ने (Drop-out) की दर को कम करने में मदद की है।
नीति आयोग का मूल्यांकन: मिशन शक्ति की सार्थकता
नीति आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019 से 2024 तक किए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में 'मिशन शक्ति' की उप-योजना 'संबल' (जिसमें बीबीबीपी शामिल है) को अत्यंत प्रासंगिक पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डेटा-आधारित सेवाओं और सामूहिक जन-भागीदारी ने लैंगिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
