मुंबई/खमनोर। अपनों से दूर महानगर की चकाचौंध में भी अपनी मिट्टी की खुशबू और जड़ों से जुड़ाव की एक अनुपम मिसाल मुंबई के विरार में देखने को मिली। ऐतिहासिक धरा हल्दीघाटी खमनोर से ताल्लुक रखने वाली बहन-बेटियों का 'तीसरा स्नेह सम्मेलन' विरार की धरा पर पूरी भव्यता और आत्मीयता के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और प्रवासी परिवारों के बीच आपसी प्रेम व एकता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

हल्दीघाटी की वीर प्रसूता माटी का गौरव इन बेटियों के चेहरे पर साफ झलक रहा था। कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत उत्साह के साथ हुई, जहाँ खमनोर से आकर मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में बसीं महिलाओं ने अपनी स्मृतियों को ताजा किया। इस वृहद आयोजन की सफलता के पीछे एक लंबी फेहरिस्त उन कर्मठ महिलाओं की है, जिन्होंने दिन-रात एक कर इस संगम को साकार किया। आयोजन को सफल बनाने में सज्जन बेन पामेचा, बेबी बहन पामेचा, प्रेमा बहन राका, अंजु कागरेचा (रोहा), किरण मंडोत (पुणे), सुमित्रा लोढ़ा, साधना कागरेचा, पिस्ता कागरेचा, पुष्पा राठौड़, और संगीता कछारा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सम्मेलन की गरिमा को बढ़ाते हुए संगीता कागरेचा, ललिता संचेती, कला राय सोनी, संगीता सामोता, कला, साधना, केलाश, पिस्ता, सपना, संगीता, ललीता, सुमित्रा, कैलाश, पिंकी, पुष्पा, मधु, सजन बाई, ललीता, प्रेमलता, मिरा, मीना, लीला, अंजना, रेखा, बेबी, किरण, लीला, प्रेमा, दिव्या, लाड़, लीला, सोनल, रेखा, ममता, कविता, संतोष, संगीता, रेखा, कमला, भारती, सीमा, लाड़ और पूजा जैसे समर्पित नामों ने अपनी उपस्थिति और सहयोग से इस कार्यक्रम को यादगार बनाया। मंच का कुशल और प्रभावी संचालन पुष्पा राठौड़ द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से पूरे सदन को बांधे रखा।

कार्यक्रम के दौरान समाज की एकजुटता पर बल दिया गया और इस बात को रेखांकित किया गया कि भौगोलिक दूरियां कभी भी पारिवारिक और आंचलिक रिश्तों में बाधक नहीं बन सकतीं। खमनोर की इन बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया कि वे जहाँ भी रहें, अपनी संस्कृति और संस्कारों को जीवंत रखना बखूबी जानती हैं। यह स्नेह सम्मेलन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा पुंज साबित होगा, जो उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता रहेगा। समारोह का समापन एक नई ऊर्जा और अगले मिलन के संकल्प के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी जनों के हृदय में आत्मीयता की अमिट छाप छोड़ी।

मनीष पालीवाल

मनीष पालीवाल

मनिष पालीवाल, मुंबई स्थित अनुभवी पत्रकार हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय खबरों की रिपोर्टिंग में माहिर हैं। अपनी गहन जांच और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनिष हमेशा ताजा और विश्वसनीय समाचार पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं। उनके लेखों में निष्पक्षता, तथ्यपरक विश्लेषण और स्थानीय घटनाओं की गहराई दिखाई देती है, जिससे पाठकों को समाचार का पूरा परिप्रेक्ष्य समझ में आता है। प्रात:काल में, मनिष पालीवाल की रिपोर्टिंग ने पाठकों के बीच विश्वास और लोकप्रियता दोनों ही अर्जित की है। मुलरुप से पालीवाल मेवाड़ नाथद्वारा क्षेत्र के केसुली गांव के निवासी है। यह दै.प्रात:काल के साथ 2003 से कार्यरत है।


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