शिवानी सालवी: पॉकेट मनी से करती हैं सैकड़ों लावारिस पिल्लों की देखभाल
राजसमंद की आठवीं की छात्रा शिवानी पिछले तीन वर्षों से बेजुबान जानवरों के लिए भोजन और गर्म कपड़ों का प्रबंध कर समाज में इंसानियत की मिसाल पेश कर रही हैं।

राजसमंद के रेलमगरा में आठवीं कक्षा की छात्रा शिवानी सालवी सड़क पर रहने वाले पिल्लों को दूध पिलाकर उनकी देखभाल सुनिश्चित करती हुई।
पॉकेट मनी से हर साल करती है सैकड़ों पिल्लों की देखभाल
मुबंई। राजसमंद ज़िले के रेलमगरा कस्बे की मूल निवासी शिवानी सालवी ने बेजुबान श्वान के बच्चों के लिए सेवा की ऐसी कहानी लिखी है की अब हर ओर उसके काम की चर्चा हो रही है। सिर्फ आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली शिवानी सालवी पिछले तीन वर्षों से सर्दियों में सड़कों पर रहने वाले कुत्तों और उनके छोटे पिल्लों के लिए गर्म कपड़ों और भोजन की व्यवस्था करती आ रही है। शिवानी की कहानी को विश्व स्तर पर काम करने वाली संस्था *पेटा* ने भी सराहा है।
प्रेरणा की कहानी: एक हादसे से बदली सोच
शिवानी कहती है की उसको यह काम करने की प्रेरणा - “तीन साल पहले पैर में फ्रैक्चर होने की घटना के साथ शुरू होती है। इलाज के लिए राजसमंद गए थे। वापसी में एरिकेशन पाल के पास एक पिल्ला ठंड से कांप रहा था। मेरे भाई शिवम ने कार की सीट से तौलिया निकालकर उसे ओढ़ाया। पापा ने डांटने के बजाय हमें शाबाशी दी और कहा- ‘जानवरों की मदद करना सबसे बड़ी इंसानियत है।’ उसी दिन से मैंने ठान लिया कि मैं भी इन मासूमों के लिए कुछ करूंगी।”
पॉकेट मनी और पुराने कपड़ों से सेवा
- शिवानी अपने घर के पुराने ऊनी कपड़ों से छोटे-छोटे सेवाघर बनाती है।
- वह अपने पॉकेट मनी के पैसों से बिस्किट और दूध खरीदती है।
- वह रोज़ाना गली-मोहल्ले में घूमकर पिल्लों को खिलाती है।
शिवानी, निक्कू और उनकी टोली का अभियान
शिवानी के इस नेक काम ने अब उसके दोस्तों को भी प्रेरित किया है। कोई पुरानी टी-शर्ट लाता है, कोई खाली बर्तन। अब अपने घर और स्कूल के पास कई स्थानों पर शिवानी, निक्कू और उसकी टोली रोज़ दाना-पानी और दूध की व्यवस्था करती है। नन्ही बच्ची हर रोज़ अपने स्कूल बैग के साथ एक और जिम्मेदारी भी उठाती है, बेजुबानों की सेवा की। शिवानी के हाथों में जब पुरानी ऊनी स्वेटर या फटा कम्बल होता है, तो वह किसी कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि ठिठुरते मासूमों के लिए एक गर्म उम्मीद की चादर होती है।
संस्कार और आदर्श: सेवालय का प्रभाव
शिवानी के पिता नानालाल सालवी सामाजिक संस्था सेवालय से जुड़े हैं और कई जनसेवा अभियानों में सक्रिय रहते हैं। पिता के साथ सेवालय की गतिविधियों में भाग लेकर ही शिवानी ने दूसरों की मदद करने का संस्कार पाया। वह सेवालय से जुड़ी आर पी एस अधिकारी नेहा राव को अपना आदर्श मानती है और कहती है - “मैं भी बड़ी होकर नेहा दीदी की तरह समाज की सेवा करना चाहती हूँ।”
इंसानियत की मिसाल
आज जब बच्चे मोबाइल और गेम्स में खोए रहते हैं, वहीं यह नन्ही बच्ची इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जो दिल को छू जाती है। शिवानी कहती है- “इन पिल्लों को देखकर मुझे लगता है कि भगवान ने इन्हें हमारे भरोसे छोड़ा है। अगर हम इन्हें नहीं बचाएँगे, तो कौन बचाएगा?”
निष्कर्ष: सेवा और करुणा की कोई उम्र नहीं
दान पुण्य और सेवा के पर्व पर शिवानी सालवी की कहानी हमें यह सिखाती है कि सेवा और करुणा की उम्र नहीं होती। जहां दुनिया अक्सर “अपने लिए” सोचती है, वहीं यह छोटी बच्ची “ दूसरों के लिए” जीने का सुकून ढूंढ चुकी है। सर्दियां उसके लिए कोई मौसम नहीं - एक अवसर हैं, प्यार और इंसानियत बाँटने का।

मनीष पालीवाल
मनिष पालीवाल, मुंबई स्थित अनुभवी पत्रकार हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय खबरों की रिपोर्टिंग में माहिर हैं। अपनी गहन जांच और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनिष हमेशा ताजा और विश्वसनीय समाचार पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करते हैं। उनके लेखों में निष्पक्षता, तथ्यपरक विश्लेषण और स्थानीय घटनाओं की गहराई दिखाई देती है, जिससे पाठकों को समाचार का पूरा परिप्रेक्ष्य समझ में आता है। प्रात:काल में, मनिष पालीवाल की रिपोर्टिंग ने पाठकों के बीच विश्वास और लोकप्रियता दोनों ही अर्जित की है। मुलरुप से पालीवाल मेवाड़ नाथद्वारा क्षेत्र के केसुली गांव के निवासी है। यह दै.प्रात:काल के साथ 2003 से कार्यरत है।
