पर्वाधिराज पर्युषण के छठे दिवस को जप दिवस के रूप में मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से सूरत से समागत उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना के निर्देशन में यह आयोजन हुआ। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, डोंबिवली के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, डोंबिवली में आयोजित धर्मसभा में मंत्र जप के आध्यात्मिक महत्व और जैन परंपरा में इसके स्थान पर चर्चा हुई।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि भारत अध्यात्म प्रधान देश है और यहां विविध धर्मों के अनुयायी निवास करते हैं। दुनिया के लगभग सभी धर्मों में जप का महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि जप केवल दो अक्षरों का शब्द है, लेकिन इस छोटे से शब्द में बहुत बड़ी शक्ति छिपी हुई है। उनके अनुसार किसी भी मंत्र का एकाग्रतापूर्वक जप करने से उसका फल अवश्य मिलता है।

उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने जैन धर्म में नवकार मंत्र के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्र अनेक हैं। बाकी सभी मंत्र को मंत्र कहा जाता है, लेकिन नवकार मंत्र को महामंत्र कहा गया है। इसमें चौदह पूर्वों का सार समाहित बताया गया है। उन्होंने कहा कि नमस्कार महामंत्र को सभी पापों को हरने वाला बताया गया है। उनके अनुसार इसका जाप करने से अनेक पूर्व संचित पाप कर्मों के नाश और अनेक संकटों से बचाव की मान्यता है। उन्होंने इसे आत्म शुद्धि का अमोघ साधन बताया।



उन्होंने कहा कि मोक्ष प्राप्ति में मुख्य रूप से दो अवरोध हैं—अहंकार और ममकार। उनके अनुसार जप के माध्यम से अहंकार और ममकार को दूर करने में सहायता मिल सकती है। मंत्र विद् आचार्यों के मत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मंत्र जप से जीभ पर अमृत का स्राव होता है। पवित्र मंत्र का नियमित जप करने से चित्त शुद्धि होने की बात भी उन्होंने कही।

सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने कहा कि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में मंत्र जप को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्र जप से अनेक संकटों को टाला जा सकता है। उन्होंने मंत्र जप से जुड़ी ऐसी कई चामत्कारिक घटनाओं का वर्णन किया, जिनके माध्यम से उन्होंने मंत्र जप की अद्भुत शक्ति का परिचय दिया। इस अवसर पर सामूहिक मंत्र जप का प्रयोग भी किया गया।

तेरापंथी सभा, डोंबिवली के अध्यक्ष डॉ मदनलाल कोठारी एवं तेयुप. डोंबिवली के अध्यक्ष बिपिन मेहता ने आगामी कार्यक्रमों के संबंध में कुछ आवश्यक जानकारी प्रस्तुत की। पर्युषण के छठे दिन आयोजित धर्मसभा में जप और मंत्र साधना के आध्यात्मिक महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

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