बरेका में नराकास वाराणसी की छमाही बैठक, हिंदी के प्रभावी प्रयोग पर हुआ मंथन
बरेका वाराणसी में नराकास की छमाही बैठक आयोजित हुई, जिसमें राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग, डिजिटल माध्यमों में हिंदी के बढ़ते उपयोग और कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई।

बनारस रेल इंजन कारखाना में नराकास की बैठक के दौरान संबोधित करते हुए बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), वाराणसी की छमाही बैठक बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका), वाराणसी में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नराकास के अध्यक्ष एवं बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने की।
बैठक का शुभारंभ अध्यक्ष आशुतोष पंत के स्वागत एवं स्मृति-चिह्न स्वरूप पुस्तक भेंट कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं नराकास के उपाध्यक्ष रामजन्म चौबे ने राजभाषा हिंदी के प्रभावी, व्यवहारिक एवं जनोन्मुखी प्रयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन नराकास के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, बरेका यथार्थ पाण्डेय ने किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में बरेका महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने कहा कि राजभाषा हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं, बल्कि प्रशासन और जन संपर्क के बीच एक सशक्त सेतु है।
बैठक के दौरान नराकास, वाराणसी की पत्रिका "बनारस दर्पण" तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू), वाराणसी की राजभाषा पत्रिका "अभ्युदय" का लोकार्पण भी किया गया।
इस छमाही बैठक में वाराणसी नगर के 60 से अधिक केंद्रीय कार्यालयों के प्रमुखों, विभागाध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी आशीष जैन ने कहा कि "किसी भी संगठन की सफलता की कुंजी जनता से उसका जुड़ाव है और हिंदी इस जुड़ाव का सबसे सशक्त माध्यम है।"
वहीं सहायक निदेशक (कार्यान्वयन), गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, अजय कुमार चौधरी ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल माध्यमों में हिंदी के बढ़ते उपयोग तथा सदस्य कार्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में बरेका के उप महाप्रबंधक सागर एवं प्राचार्य, प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र सुभाष चंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
अंत में नराकास के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, बरेका यथार्थ पाण्डेय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बैठक में हुए सार्थक विचार-विमर्श एवं सुझावों से वाराणसी के सदस्य कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को नई गति, नई ऊर्जा एवं नई दिशा प्राप्त होगी।

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