मुंबई में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री ठाणा 6 के पावन सान्निध्य में समुत्कर्ष व अवबोध कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसमें मुंबई सेन्ट्रल जोन के प्रतिभासंपन्न विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों ने भी भाग लिया। कार्यशालाओं के दौरान विद्यार्थियों को विद्या के साथ संस्कारों के अर्जन, अनुशासन और कठिन परिश्रम के महत्व से अवगत कराया गया।

उपस्थित मेधावी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा, "सा मेधा धारण क्षमा।" उन्होंने कहा कि जो धारण करने में समर्थ हो, वह मेधा है। आज मुंबई सेन्ट्रल जोन के प्रतिभासंपन्न विद्यार्थियों का सम्मान किया जा रहा है। विद्यार्थी जीवन विद्या के साथ संस्कारों के अर्जन का समय है। परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण की पवित्र सन्निधि में सघन साधना जीवन में सत् संस्कारों के बीजारोपण का सार्थक उपक्रम है।

इस अवसर पर साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने मुख्य प्रशिक्षण में सघन साधना शिविर के बारे में विस्तार से अवगति दी। उन्होंने कहा कि चुनौतियां जीवन को निखारती हैं। विद्यार्थी जीवन में जो बाह्य सुख-सुविधाओं के स्थान पर कठिन परिश्रम और साधना की राह चुनते हैं, वे स्वयं को निखारते हैं।

कार्यक्रम में साध्वी लावण्यप्रभा ने 'परमेष्ठी' गीत का मधुर संगान किया। तेरापंथ सभा मुंबई के अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी ने गुरु सन्निधि में शिविर के लिए साध्वीश्री द्वारा करवाए जा रहे परिश्रम को सचमुच अभिनंदनीय बताया। उन्होंने बच्चों को अनुशासन की प्रेरणा भी दी।

टीपीएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष कोठारी और स्थानीय अध्यक्ष राहुल डांगी ने भी प्रासंगिक अभिव्यक्ति दी। वहीं, ममता कच्छारा और चेतन लोढ़ा सहित अन्य ने बच्चों को उपयुक्त प्रशिक्षण दिया।

इस अवसर पर मुंबई के विभिन्न उपनगरों से बच्चे और अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को विद्या के साथ संस्कार, अनुशासन और साधना के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया गया।

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