मुंबई। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, मेवाड़ के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। संघ में पिछले लंबे समय से पुरजोर तरीके से चली आ रही लोकतांत्रिक मांग पर वर्तमान कार्यकारिणी ने एक अत्यंत युगांतकारी और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पूरे 42 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद संघ के सभी साधारण सदस्यों को चुनाव में मतदान करने का सर्वाधिकार प्रदान कर दिया गया है। कार्यकारिणी के इस क्रांतिकारी फैसले की घोषणा होते ही संपूर्ण मेवाड़ संघ में अभूतपूर्व हर्ष, जबरदस्त उत्साह और जश्न का वातावरण व्याप्त हो गया है।



मुंबई के गोरेगांव स्थित प्रतिष्ठित मेवाड़ भवन में आयोजित संघ की अत्यंत महत्वपूर्ण साधारण सभा में इस ऐतिहासिक निर्णय सहित समाज हित से जुड़े कई अन्य अहम विषयों पर अत्यंत विस्तृत और गंभीर चर्चा की गई। आध्यात्मिक माहौल के बीच इस विशेष बैठक की शुरुआत मांगलिक मंगलाचरण से हुई। साधारण सभा को संबोधित करते हुए संघ के यशस्वी अध्यक्ष भेरूलाल लोढ़ा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि जब हम स्वहित की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर सर्वोपरि संघहित में कार्य करते हैं, तभी किसी भी समाज को एक गौरवशाली, मजबूत और विशिष्ट पहचान मिल सकती है। इसके पश्चात कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए संघ के ऊर्जावान महामंत्री प्रकाश नाहर ने पूरी रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने बताया कि संघ के आम सदस्यों की ओर से लंबे समय से लोकतंत्र की बहाली और मतदान के अधिकार की मांग निरंतर की जा रही थी। इसी जनभावना को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष भेरूलाल लोढ़ा के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में वर्तमान कार्यकारिणी ने सभी आवश्यक एवं जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को पूर्णता के साथ समय रहते पूरा कर लिया है। उन्होंने आधिकारिक घोषणा की कि आगामी वर्ष 2027 में होने वाले संघ के चुनावों से मेवाड़ संघ के प्रत्येक सदस्य को मतदान का पूर्ण अधिकार प्रदान किया जाएगा। जैसे ही महामंत्री द्वारा इस ऐतिहासिक अधिकार की आधिकारिक घोषणा की गई, पूरा सभा स्थल "अंबेश गुरु" के गगनभेदी जयकारों और हर्षध्वनि से गूंज उठा।

आधिकारिक और वित्तीय प्रक्रियाओं के तहत, संघ के कोषाध्यक्ष फूलचंद नाहर ने मार्च 2026 तक का अत्यंत विस्तृत एवं पारदर्शी आय-व्यय विवरण (लेखा-जोखा) सदन के पटल पर प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने उपस्थित सदस्यों द्वारा वित्तीय स्थिति को लेकर पूछे गए सभी गंभीर प्रश्नों के अत्यंत संतोषजनक उत्तर दिए, जिसके बाद संपूर्ण साधारण सभा ने सर्वसम्मति से इस पूरे लेखा-जोखा को ध्वनिमत से सहर्ष पारित कर दिया। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ संरक्षक चतरलाल लोढ़ा ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए विभिन्न सामाजिक एवं नीतिगत विषयों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

इस फैसले के ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि को समझाते हुए यह रेखांकित किया गया कि वर्ष 1985 में श्रमण संघ के तत्कालीन प्रखर महामंत्री सोभाग्य गुरु की पावन प्रेरणा से इस गौरवशाली संघ की स्थापना की गई थी। पूर्व में संघ की स्थापित व्यवस्था के अनुसार अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे तौर पर नहीं होकर, केवल विभिन्न उपसंघों से चुनकर आने वाले प्रतिनिधियों के माध्यम से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता था। परंतु अब, इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक निर्णय के लागू होने के तहत पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर पूर्ण रूप से प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली को धरातल पर लागू किया जाएगा, जिसमें मेवाड़ संघ का प्रत्येक वैध सदस्य पूरी स्वतंत्रता के साथ सीधे अपने मत का प्रयोग कर अपने अध्यक्ष का चयन कर सकेगा। लोकतांत्रिक ताने-बाने को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए साधारण सभा में एक और महत्वपूर्ण वैधानिक मसौदा पारित किया गया, जिसके तहत संघ की कार्यकारिणी के पदों की संख्या को बढ़ाकर कुल 101 करने की मंजूरी दी गई है। इस दूरगामी कदम से संघ की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी तथा मजबूत बनाने की उम्मीद जताई गई है।

सार्थक संवाद के इस दौर में आगामी समय में होने वाले पूज्य उप प्रवर्तक विनय मुनी महाराज साहेब एवं गौतम मुनी महाराज साहेब के आगामी पावन चातुर्मास की तैयारियों सहित समाज के अन्य धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी उपस्थित प्रबुद्ध जनों के बीच अत्यंत सकारात्मक चर्चा की गई। अंत में प्रकाश मादरेचा के मांगलिक मंगलाचरण के साथ इस ऐतिहासिक साधारण सभा का अत्यंत सौहार्दपूर्ण माहौल में विधिवत समापन हुआ।

इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण के साक्षी बनने के लिए सभा में हरकलाल लोढ़ा, शांतिलाल राठौड़, एन.एम. जैन, किशन परमार, चोथमल सांखला, रोशनलाल वडाला, दिलीप पगारिया, लालचंद बंबोरी, महेश डागलिया, लालचंद बंबोरी, भगवती पोखरना, रिखबलाल सांखला, सुरेश सोनी, अंबालाल मेहता, जितमल वागरेचा, पारस बाफना, सुंदरलाल सांखला, सुरेश सिंघवी, प्रकाश बदामा, धर्मेंद्र बाफना, शांतिलाल कोठीफोडा, प्रकाश कच्छारा, दिनेश पिपाडा, महेन्द्र पिपाडा, पारस बाफना, मनिष साखंला, मोहनलाल लोढ़ा, कषणा तलेसरा, भेरूलाल बोहरा, दिनेश वडालमिया, राजेंद्र चपलोत, संजय सियाल, दिनेश पिपाडा, लोकेश लोढा, किशन लोढा, देवीलाल चपलोत, अबांलाल मेहता, मोतीलाल नावेडिया, भगवतीलाल मादरेचा, सोहनलाल सेठिया, भोलीलाल कोठारी, धर्मेश बाफना, सोहनलाल सेठिया, सुरेश चोरड़िया आदि प्रबुद्ध समाजसेवी, पदाधिकारी और गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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Pratahkal HQ

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