Mahatma Phule Punyadin 2025 : 19वीं सदी में भारतीय समाज के निर्धन और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले का योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है। समाज सुधार और समानता के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने जातिगत भेदभाव, बाल-विवाह और विधवाओं के हक़ के मुद्दों पर क्रांतिकारी प्रभाव डाला।

ज्योतिबा फुले ने 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सामाजिक असमानताओं और जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ना और समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाना था। उनके अथक संघर्ष और समाजसेवा को देखते हुए 1888 में मुंबई की एक विशाल सभा में उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

सामाजिक सुधार के क्षेत्र में फुले ने कई नवाचार किए। उन्होंने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना विवाह संस्कार आरंभ किया, जिसे मुंबई उच्च न्यायालय ने मान्यता दी। वे बाल-विवाह के विरोधी थे और विधवा-विवाह के समर्थक। उनका मानना था कि समाज में सुधार तभी संभव है जब न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों को लागू किया जाए।

महात्मा फुले ने अपने जीवनकाल में अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें ‘गुलामगिरी’, ‘तृतीय रत्न’, ‘छत्रपति शिवाजी’, ‘राजा भोसला का पखड़ा’, ‘किसान का कोड़ा’ और ‘अछूतों की कैफियत’ शामिल हैं। इन ग्रंथों में उन्होंने समाज की कुरीतियों और किसानों के उत्पीड़न के खिलाफ सशक्त संदेश दिया। उनके संगठन और संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ को लागू किया, जो किसानों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

स्त्रियों की शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 1883 में ब्रिटिश भारत सरकार ने उन्हें “स्त्री शिक्षण के आद्यजनक” की उपाधि से सम्मानित किया। उनके जीवन और कार्य आज भी समाज में समानता, शिक्षा और न्याय के संदेश को जीवित रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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