भव्य योजना के तहत देश में बनेंगे 100 नए इंडस्ट्रियल पार्क; केंद्र सरकार ने जारी किए नियम
वाणिज्य मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹33,660 करोड़ की औद्योगिक पार्क योजना को मंजूरी दी।

नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार की औद्योगिक और निवेश नीतियों पर चर्चा करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
Bhavya Yojana Industrial Park Guidelines : भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और रणनीतिक कदम उठा लिया है। देशभर में विश्वस्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचे को खड़ा करने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘भव्य’ योजना के क्रियान्वयन को लेकर वाणिज्य मंत्रालय ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस कदम के साथ ही भारत ने वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में चीन जैसे दिग्गजों को सीधी टक्कर देने का बिगुल फूंक दिया है। यह योजना महज उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत, 'मेक इन इंडिया' और 'पीएम गति शक्ति' के सपनों को धरातल पर उतारने का एक एकीकृत महाअभियान है, जो आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी दिशा और दशा को बदलने का माद्दा रखता है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस महायोजना का मुख्य ध्येय निवेश के लिए पूरी तरह से तैयार, आधुनिक और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं से लैस औद्योगिक शहरों का निर्माण करना है। सरकार ने इसके लिए बेहद आक्रामक और चरणबद्ध समयसीमा तय की है। योजना के तहत वर्ष 2026-27 से लेकर 2031-32 तक, यानी आगामी छह वर्षों के भीतर देश के कोने-कोने में 100 अत्याधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। योजना के पहले चरण के तहत 50 पार्कों को विकसित किया जाएगा, जिसके लिए राज्यों के बीच एक पारदर्शी और कड़ी 'चुनौती आधारित प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया' अपनाई जाएगी। इसके तहत नए सिरे से बनने वाले ग्रीनफील्ड और पहले से मौजूद पात्र ब्राउनफील्ड दोनों ही तरह के पार्कों को संवारने की अनुमति दी गई है।
परियोजना की संप्रभुता और भौगोलिक संतुलन को बनाए रखने के लिए सरकार ने भूमि आवंटन के कड़े और स्पष्ट मानक तय किए हैं। देश के मैदानी या गैर-पहाड़ी राज्यों में इन पार्कों की स्थापना के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि का होना अनिवार्य किया गया है। इसके विपरीत, भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों जैसे पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए विकास की रफ्तार को बनाए रखने हेतु यह न्यूनतम सीमा 25 एकड़ रखी गई है। योजना के तहत बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1000 एकड़ तक के मेगा इंडस्ट्रियल पार्कों के प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा, ताकि वैश्विक स्तर की विशाल कंपनियां एक ही छत के नीचे अपनी पूरी विनिर्माण इकाइयां स्थापित कर सकें।
इस पूरी व्यवस्था को प्रशासनिक और कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद पेशेवर ढांचा तैयार किया है। इन सभी परियोजनाओं को 'कंपनी अधिनियम 2013' के तहत पंजीकृत विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी (Special Purpose Vehicle) के माध्यम से धरातल पर उतारा जाएगा। कानूनी रूप से अधिकृत ये एसपीवी ही इन पार्कों की रूपरेखा तैयार करने, उनके दैनिक संचालन, प्रबंधन, विदेशी व घरेलू निवेशकों को हरसंभव सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं देने और दीर्घकालिक रखरखाव के लिए पूरी तरह जवाबदेह होंगे। इसके अतिरिक्त, नीतिगत स्तर पर इस योजना को केंद्र और राज्य सरकारों की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे लॉजिस्टिक्स पार्क, कौशल विकास मिशन, नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड और क्षेत्रीय औद्योगिक नीतियों के साथ एकीकृत किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक जटिलताओं को खत्म कर गति पकड़ी जा सके।
तकनीकी और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर ये पार्क आधुनिक युग के औद्योगिक अजूबे होंगे, जहां चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और श्रमिकों के कल्याण के लिए रिहायशी व स्वास्थ्य संबंधी सहायक ढांचा मौजूद रहेगा। डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम से लैस ये पार्क टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकास की मिसाल पेश करेंगे। वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बदलने और दुनिया भर की कंपनियों द्वारा 'चीन प्लस वन' की नीति अपनाए जाने के इस दौर में, भारत सरकार की ‘भव्य’ योजना एक गेम-चेंजर साबित होने जा रही है। जब ये 100 औद्योगिक पार्क पूरी तरह क्रियाशील होंगे, तब न केवल देश में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का एक ऐसा महासागर तैयार होगा जो भारत को आने वाले समय में वैश्विक विनिर्माण का निर्विवाद केंद्र बना देगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
