Luis Diaz Bayern Munich Interview : फुटबॉल की दुनिया में अपनी जादुई रफ्तार और जुझारू जज्बे के लिए मशहूर लुइस डियाज़ ने अपनी सफलता के पीछे छिपे उस दर्दनाक संघर्ष को दुनिया के सामने रखा है, जिसने उन्हें लगभग टूटने की कगार पर पहुँचा दिया था। कोलंबिया के एक छोटे और उपेक्षित इलाके से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच 'यूईएफए चैंपियंस लीग' तक पहुँचने वाले इस खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने अपना सब कुछ खत्म मान लिया था और खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था।

गरीबी और कुपोषण की चुनौतियों के बीच बीता बचपन :

लुइस डियाज़ की कहानी कोलंबिया के ला गुआजियारा स्थित बैरंकास से शुरू होती है, जो अपनी गरीबी और सरकारी उपेक्षा के लिए जाना जाता है। डियाज़ का बचपन अभावों के बीच बीता, यहाँ तक कि वे कुपोषण का शिकार भी रहे। फुटबॉल जैसे शारीरिक रूप से थका देने वाले खेल के लिए जिस ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है, डियाज़ के पास उसकी भारी कमी थी। परिस्थितियों ने शुरू से ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, लेकिन मैदान की मिट्टी ने उन्हें लड़ना सिखाया। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हार न मानने की उनकी जिद ने ही उन्हें बैरंकास की गलियों से एटलेटिको जूनियर की युवा टीम तक पहुँचाया।

अपनों से दूरी और करियर खत्म होने का डर :

यूईएफए को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, डियाज़ ने भावुक होते हुए बताया कि 2014 में जब वे महज 17 वर्ष के थे, तब पेशेवर फुटबॉल का सपना पूरा करने के लिए उन्हें अपने माता-पिता और भाई-बहनों से दूर होना पड़ा था। डियाज़ ने स्वीकार किया, "कोलंबिया में अवसर बहुत कम हैं, उन्हें खुद तलाशना पड़ता है। अपने परिवार से दूर रहना बहुत मुश्किल था। कई बार मुझे लगा कि बस अब सब खत्म हो गया है और मैं इसे और आगे नहीं खींच पाऊँगा।" डियाज़ ने बताया कि अपनों की याद और करियर के अनिश्चित भविष्य ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया था।

प्रेरणा का स्रोत : अतीत के वो कड़वे अनुभव

डियाज़ ने खुलासा किया कि आज भी जब वे थके होते हैं या किसी कठिन मैच से गुजरते हैं, तो वे अपने अतीत के उन संघर्षों को याद करते हैं। उन्होंने कहा, "जब मेरी नींद पूरी नहीं होती या मैं थकान महसूस करता हूँ, तो मैं याद करता हूँ कि मैंने यहाँ तक पहुँचने के लिए क्या-क्या सहा है। मेरा संघर्ष अपने परिवार को एक बेहतर जीवन देने और अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए था। मैंने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन मेरी भूख अभी कम नहीं हुई है।" डियाज़ का यह बयान उन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो छोटी बाधाओं से घबराकर हार मान लेते हैं।

वर्तमान में बायर्न म्यूनिख जैसे बड़े क्लब के लिए खेल रहे डियाज़ की कहानी यह साबित करती है कि जो लोग सबसे अधिक संघर्ष करते हैं, उनमें सबसे अधिक एकाग्रता और सफल होने की अटूट इच्छा होती है। डियाज़ के करियर की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है; बल्कि यह तो उस अंतहीन संघर्ष की शुरुआत है जो उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनाने की दिशा में अग्रसर है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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