ध्यान दिवस पर साध्वी निर्वाणश्री ने कहा- ध्यान से जन्म-जन्मांतर के गाढ़ कर्म होते हैं नष्ट
मुंबई में ध्यान दिवस पर साध्वी निर्वाणश्री ने भगवान महावीर की साधना और ध्यान के महत्व को बताया, वहीं श्रद्धालुओं ने तप और धार्मिक प्रस्तुतियां दीं।

तस्वीर में ध्यान दिवस कार्यक्रम के दौरान खड़े हुए मेहमान और गणमान्य लोग दिख रहे हैं।
महातपस्वी आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में ‘ध्यान दिवस’ के अवसर पर विशेष आराधना की गई। कार्यक्रम में उपस्थित श्रावकों को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि भगवान महावीर का साधना काल ध्यान और तप का संगम था। उन्होंने अनेक प्रकार की ध्यान प्रतिमाओं की साधना की। भगवान महावीर के अनुसार ध्यान से जन्म-जन्मांतर के गाढ़ कर्म नष्ट होते हैं।
साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि गुरुदेव महाश्रमण ने भी ध्यान को अत्यधिक महत्त्व दिया और निराहार तप से भी उसे बड़ा तप बताया। युवाचार्य महाश्रमण की तपः साधना को देखते हुए उन्होंने उन्हें महातपस्वी कहा। उन्होंने कहा कि ध्यान दिवस से प्रेरणा लेकर सभी को ध्यान की गहराई में जाना चाहिए और कर्मों को खपाना चाहिए।
इस अवसर पर साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने धाराप्रवाह वक्तव्य में भगवान पार्श्वनाथ के पूर्वभव एवं वर्तमान जीवन की रोचक घटनाएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने भगवान के जीवन से प्रेरणा लेते हुए भाव एवं स्वभाव परिवर्तन की सशक्त प्रेरणा दी।
साध्वी मुदितप्रभा ने नवग्रहगर्भित पार्श्व स्तुति का मंगल संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महामंत्र नमस्कार के सस्वर पाठ से हुआ। इसके बाद साध्वी ने उपस्थित श्रावकों को ध्यान का प्रयोग करवाया।
सायन, वडाला, माटुंगा और धारावी महिला मंडल ने भगवान महावीर की स्तवना प्रस्तुत की। तेयुप घाटकोपर ने प्रेक्षाध्यान गीत का संगान किया। तेरापंथ किशोर मंडल, चेम्बूर के किशोरों ने ‘सिरियारीवाले सांवरे’ गीत की सुंदर प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में करीब 35 भाई-बहनों व बच्चों ने अठाई आदि तप का उपहार अर्पित किया। रात्रिकालीन कार्यक्रमों में ज्ञानशाला चेम्बूर की आकर्षक प्रस्तुति रही। तेममं चेम्बूर द्वारा तप वंदना भक्ति की शानदार प्रस्तुति दी गई।
आज के कार्यक्रम में स्थानीय आमदार तुकाराम काते प्रवचन श्रवण हेतु विशेष रूप से उपस्थित रहे। ध्यान दिवस की आराधना में साध्वीवृंद के मार्गदर्शन, ध्यान प्रयोग, धार्मिक प्रस्तुतियों और तप के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मसाधना तथा कर्म क्षय की दिशा में प्रेरणा मिली।

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