मुंबई। छत्रपति संभाजीनगर के पैठण गेट स्थित तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के अवसर पर आचार्य महाश्रमण के निर्देशानुसार धर्म आराधना के लिए छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे मुंबई के उपासक भगवतीलाल चौहान एवं बाबूलाल बाफना ने श्रद्धालुओं को स्वाध्याय के महत्व से अवगत कराया।

दोनों उपासकों ने संयुक्त रूप से कहा कि स्वाध्याय का वास्तविक अर्थ केवल धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना नहीं, बल्कि ‘स्व’ का अध्ययन करना है। व्यक्ति जब अपने भीतर झांकता है और अपनी आत्मा के स्वरूप को समझने का प्रयास करता है, तभी स्वाध्याय की सार्थकता सिद्ध होती है।

उन्होंने कहा कि स्वाध्याय व्यक्ति के जीवन में विवेक जागृत करता है। ज्ञान के माध्यम से मनुष्य अच्छे-बुरे, उचित-अनुचित तथा हित-अहित का भेद समझ पाता है। नियमित स्वाध्याय से विचारों में सकारात्मकता, व्यवहार में संयम और जीवन में आत्मानुशासन का विकास होता है।

उपासकों ने श्रद्धालुओं से पर्युषण के दौरान अधिक से अधिक समय स्वाध्याय, सामायिक, ध्यान, तप और आत्मचिंतन में लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में तेरापंथ सभा के पदाधिकारीगण सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य और बड़ी संख्या में तेरापंथ समाज के श्रद्धालु भाई-बहन उपस्थित रहे।

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Pratahkal Bureau

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