मुंबई। जैन समाज की गौरवशाली और प्राचीनतम संस्था 'भारत जैन महामंडल' के तत्वावधान में भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्मकल्याणक महोत्सव दादर स्थित योगी सभागृह में पूर्ण श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्रमणोपाध्याय विरजनसागर महाराज साहेब, आचार्य नयपद्मसागर महाराज साहेब आदिठाना, श्रमण मुनि विसौम्यसागर महाराज साहेब, मुनि कुलदीपकुमार स्वामी एवं मुनि मुकुल कुमार स्वामी के पावन सानिध्य में आयोजित इस गरिमामय समारोह ने जैन एकता की एक नई मिसाल पेश की। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार महामंत्र के मंगल उच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत भाषण देते हुए महामंडल के अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड़ ने जैन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं जो हमें यह धर्म मिला; उन्होंने समस्त जैन समाज से अपील की कि वे संस्था का सदस्य बनकर जैन एकता को सुदृढ़ करें ताकि मानव सेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए जा सकें। इसी मंच से तातेड़ ने जैन हॉस्टल के निर्माण की महत्वपूर्ण घोषणा की और लाड़नू में जारी योगक्षेम वर्ष का उल्लेख करते हुए मुनिवृंद के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की।

समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वैश्विक अशांति और हिंसा के दौर में महावीर के सिद्धांतों को अपरिहार्य बताया। शिंदे ने कहा कि आतंकवाद जहां विनाश की बात करता है, वहीं महावीर स्वामी 'जियो और जीने दो' का सार्वभौमिक संदेश देते हैं; यह जयंती केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है कि हम अपनी वाणी पर संयम रखें और संघर्षरत विश्व को विनाश से बचाएं। विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने समाज को सरकार और हिंदू समाज के साथ समन्वय बनाकर चलने की आवश्यकता पर बल दिया। आध्यात्मिक चेतना जगाते हुए जनसंत विरजन सागर महाराज ने स्पष्ट किया कि भगवान को मानने के साथ-साथ उनकी बातों को आचरण में उतारना ही वास्तविक कल्याण है। वहीं, आचार्य नयपद्म सागर महाराज ने नारी शक्ति की वंदना करते हुए कहा कि एक संस्कारी नारी ही संसार को स्वर्ग बना सकती है; उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की आजादी की बुनियाद में जैन संस्कारों का प्रभाव था क्योंकि महात्मा गांधी की माताजी जैन थीं।

मुनिश्री कुलदीप कुमार स्वामी ने वर्धमान के महावीर बनने की आध्यात्मिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए उनके चिंतन को आज की महती आवश्यकता बताया। कार्यक्रम में वैचारिक गहराई जोड़ते हुए स्वागताध्यक्ष दिलीप मेहता ने प्रतिवर्ष 10 हजार बालिकाओं को शिक्षित करने के अपने संकल्प को दोहराया। ललित डांगी ने ख्यालीलाल तातेड़ के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए महावीर के सिद्धांतों को आधुनिक युग में भी पूर्णतः प्रासंगिक बताया और 'जीतो' की कार्यप्रणाली पर चर्चा की। युवा अध्यक्ष भूपेश कोठारी ने महावीर के विचारों को 'एडवांस टेक्नोलॉजी' की संज्ञा दी, तो महिला अध्यक्ष तरुणा बोहरा ने महामंडल को चारों संप्रदायों का अनूठा संगम बताते हुए 'जन्मना नहीं बल्कि कर्मणा जैन' बनने का आह्वान किया। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम और शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने भी अपने संबोधन से सभा को प्रेरित किया। इस ऐतिहासिक समागम में भाजपा नेत्री योजना ढोकले, मेहुल दिलीप पी. मेहता, के. के. तातेड़, पी. पी. डांगी परिवार सहित सुरेश आंचलिया, बी. सी. भलावत, मानक धींग, भंवरलाल कर्णावट और सुरेंद्र कोठारी जैसे गणमान्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। राष्ट्रीय महामंत्री बाबूलाल बाफना के कुशल संचालन में संपन्न यह कार्यक्रम जैन समाज की शक्ति, सेवा और संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story