भीतर उतरने की अनकही कला, महावीर की साधना से समझाया आत्मजागरण का मार्ग
ठाणे में मुनि कुलदीप कुमार ने भगवान महावीर की साधना का वर्णन किया, जबकि मुनि मुकुल कुमार ने ध्यान के नवीन प्रयोगों से आत्मजागरण की राह समझाई।

तस्वीर में मंच पर बैठे हुए संतों और उनके आसपास खड़े लोगों का समूह दिख रहा है।
ठाणे में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम में भगवान महावीर की साधना और ध्यान की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर विशेष प्रकाश डाला गया। मुनि कुलदीप कुमार ने भगवान महावीर के साधना काल का प्रभावशाली वर्णन करते हुए उनकी कठोर तपस्या, एकाग्रता, सहनशीलता और आत्मजागरण की साधना से जुड़े विभिन्न प्रसंग प्रस्तुत किए। वहीं मुनि मुकुल कुमार ने ध्यान को नवीन एवं प्रयोगात्मक दृष्टिकोण से समझाते हुए इसे जीवन में उतारने की व्यावहारिक विधियां बताईं।
मुनि कुलदीप कुमार ने कहा कि भगवान महावीर की साधना केवल बाहरी तप तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह भीतर की चेतना को जागृत करने और आत्मस्वरूप की अनुभूति की यात्रा थी। उनके साधना काल के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को कठोर तप, एकाग्रता, सहनशीलता और आत्मजागरण के महत्व से परिचित कराया।
मुनि मुकुल कुमार ने ध्यान के विषय को सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ध्यान क्या है, ध्यान क्यों करना चाहिए, ध्यान कैसे किया जाए और ध्यान का वास्तविक उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठ जाने का नाम नहीं है, बल्कि विचारों की भीड़ से स्वयं को अलग कर अपनी चेतना के केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया है।
उन्होंने ध्यान के दौरान मन की चंचलता, विचारों के आवागमन और एकाग्रता की चुनौतियों को अनेक प्रैक्टिकल उदाहरणों एवं दृष्टांतों के माध्यम से समझाया। इसके साथ ही कुछ अति नवीन एवं रहस्यमय ध्यान-प्रयोगों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को अनुभव कराया कि सही विधि, सही जागरूकता और निरंतर अभ्यास के जरिए ध्यान को जीवन का सहज हिस्सा बनाया जा सकता है।
मुनि मुकुल कुमार के प्रयोगात्मक विवेचन ने श्रोताओं को ध्यान की जानकारी देने के साथ ही उसे व्यवहार में उतारने की प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम के दौरान वातावरण आध्यात्मिक एवं एकाग्रतामय बना रहा। दोनों संतों के प्रेरणादायी वक्तव्यों ने उपस्थित जनसमुदाय को भगवान महावीर की साधना से प्रेरणा लेते हुए आत्मचिंतन, संयम और ध्यान की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मंगलाचरण भांडुप महिला मंडल ने किया।

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