जिले के अभ्यारण्यों में वन्यजीव गणना आज से नए समय निर्धारण के साथ शुरू हो रही है, जिसमें इस बार अहम बदलाव किया गया है। पहली बार गणना का समय बदला गया है, ताकि अधिक से अधिक वन्यजीवों की सटीक गिनती हो सके और भीषण गर्मी से भी बचाव किया जा सके।

अब यह गणना सुबह 8 बजे की बजाय शाम 5 बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी। उपवन संरक्षक मृदुला सिंह के अनुसार इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह है कि गर्मी के मौसम में वन्यजीव अधिकतर शाम और रात के समय सक्रिय रहते हैं। ऐसे में शाम से गणना शुरू करने पर उनकी गतिविधियों को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड किया जा सकेगा।

पूर्व में गणना सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, जिससे रात का समय काफी देर बाद आता था और तब तक टीम काफी काम कर चुकी होती थी। इस कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता था। इस बार हीट वेव को देखते हुए समय में बदलाव किया गया है, ताकि शाम से ही गणना शुरू हो और रात के समय, जब वन्यजीव ज्यादा सक्रिय होते हैं, तब टीम पूरी तरह सतर्क और ताजगी के साथ उन्हें देख सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे कर्मचारियों को गर्मी से राहत मिलेगी और गणना अधिक सटीक व प्रभावी बनेगी।

मृदुला सिंह के अनुसार सीतामाता सेंचुरी में 47 वॉटर हॉल बनाए गए हैं, जबकि बस्सी सेंचुरी में 24 वॉटर हॉल चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर वन्यजीवों के पानी पीने की संभावना अधिक रहती है, इसलिए यहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अतिरिक्त इस बार नालों और केनाल के आसपास भी मचान बनाकर कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा, ताकि वहां आने वाले वन्यजीवों पर भी नजर रखी जा सके।

गणना को और अधिक सटीक बनाने के लिए कैमरा ट्रैप का भी उपयोग किया जा रहा है। सीतामाता सेंचुरी में करीब 20 से 22 कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं, जबकि बस्सी सेंचुरी में लगभग 14 कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की सहायता से उन वन्यजीवों की भी पहचान संभव होगी, जो सीधे नजर नहीं आते या रात के समय ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

यह गणना आज शाम 5 बजे से शुरू होकर 2 मई की शाम 5 बजे तक लगातार चलेगी। इस दौरान वन विभाग की टीमें अलग-अलग स्थानों पर मचानों पर बैठकर वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगी और उनकी संख्या दर्ज करेंगी। यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर की जाती है, जब चांदनी रात में वन्यजीवों को देखना आसान होता है।

वन विभाग ने इस गणना को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों और वन्यजीव प्रेमियों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया है। समय में किया गया यह बदलाव न केवल गणना प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाएगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी नई दिशा देगा।

Pratahkal Bureau

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