चित्तौड़गढ़। महेश वाटिका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान आचार्य पं मिथिलेश नागर ने भागवत कथा के अद्भुत महत्व और आध्यात्मिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत कथा एक देव दुर्लभ कथा है, जिसका श्रवण मात्र से ही जीव का कल्याण संभव है। आचार्य नागर ने स्पष्ट किया कि हरि की कथा का कोई सौदा नहीं किया जा सकता; यह अमृत कथा है जिसे लोगों में ज्ञान और भक्ति का प्रकाश फैलाने के लिए साझा किया जाता है।

आचार्य पं नागर ने जीवन में गुरु की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु बनाना चाहिए। गुरु दक्षिणा के रूप में व्यक्ति को अपने अवगुणों का समर्पण गुरु के चरणों में करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ और मोह से दूर रहकर हरि नाम का स्मरण करना चाहिए।

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा स्व. हरक लाल बाहेती की स्मृति में कृष्णा देवी, राजकुमार और गोपाल बाहेती परिवार द्वारा आयोजित की जा रही है। कथा का वाचन आचार्य पं नागर निनोरा धाम की ओर से कर रहे हैं। गुरुवार के दिन कथा में आत्मदेव और धुंधली चरित्र, श्री कपिल भगवान की उत्पत्ति और भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन किया गया। विशेष रूप से भगवान विष्णु के वामन अवतार और हीरणा कश्यप वध की कथा को सचित्र माध्यम के द्वारा प्रस्तुत किया गया।

भागवत कथा का समापन आज राम जन्म और श्री कृष्ण जन्म की कथा के साथ नंदोत्सव मनाने के कार्यक्रम के माध्यम से होगा। इस कथा आयोजन ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत किया।

इस प्रकार, महेश वाटिका में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन न केवल धार्मिक महत्ता रखता है, बल्कि यह समाज में भक्ति और नैतिक मूल्यों को प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी साबित हो रहा है।

Pratahkal Bureau

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