उदयपुर स्थित भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय द्वारा डूंगला क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोरवन निवासी विश्वजीत जारोली को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने यह शोध कार्य प्राणी-शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अभिमन्यु सिंह राठौड़ के निर्देशन में पूर्ण किया।

विश्वजीत जारोली ने “किशनगढ़, जिला अजमेर, राजस्थान के गुंदोलाव झील एवं हमीर तालाब की जलीय पारिस्थितिकी के कतिपय भौतिक और रासायनिक प्राचलों का तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर शोध किया। इस शोध में दोनों जलीय स्रोतों में प्रदूषण स्तर, जंतुप्लवकों का गुणात्मक एवं मात्रात्मक अध्ययन भी शामिल रहा।

शोध के निष्कर्षों के अनुसार दोनों ही जलीय स्रोत सूपोषणीय स्तर के एवं क्षारीयता युक्त पाए गए। भौतिक-रासायनिक प्राचलों तथा जंतुप्लवकों के आपसी सांख्यिकीय सह-संबंध के आधार पर गुंदोलाव झील, हमीर तालाब की तुलना में कम प्रदूषित पाई गई। इसके पीछे कारणों में हमीर तालाब में गिरने वाले प्रदूषित नाले का जल, चमड़ा घर से निकलने वाले हानिकारक रसायन, उच्च टीडीएस, मानवीय हस्तक्षेप, जलकुंभी का प्रसार तथा रख-रखाव में कमी को प्रमुख बताया गया।

जारोली वर्तमान में श्री रतनलाल कंवरलाल पाटनी गर्ल्स कॉलेज, किशनगढ़ में प्राणीशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर विगत 11 वर्षों से कार्यरत हैं तथा उनके पास 22 वर्षों का महाविद्यालय शिक्षण अनुभव है। वे मूलतः ग्राम मोरवन निवासी हैं। उनके पिता रूपलाल जारोली हैं, जो राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ईडरा, जिला चित्तौड़गढ़ से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक रहे हैं।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय माध्यमिक विद्यालय मोरवन तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डूंगला से हुई।

यह उपलब्धि न केवल अकादमिक शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि जलीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणीय संरक्षण के अध्ययन के लिए भी एक उल्लेखनीय योगदान के रूप में देखी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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