जावद: विक्रम सीमेंट फैक्ट्री के दो कर्मचारियों को श्रमिक की मौत के मामले में सजा
जावद न्यायालय ने 2018 में हुई हुकमसिंह की मृत्यु के मामले में लापरवाही बरतने पर सिविल इंजीनियर और कर्मचारी को 6-6 माह के कारावास की सजा सुनाई।

निम्बाहैड़ा/जावद। औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति बरती गई घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। श्रीमती शुभा रिछारिया दीक्षित, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जावद, जिला नीमच द्वारा थाना जावद क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम खोर स्थित विक्रम सीमेंट फैक्ट्री के दो कर्मचारियों को एक मजदूर की मृत्यु का उत्तरदायी मानते हुए सजा सुनाई गई है। मामले में दोषी पाए गए फैक्ट्री के सिविल इंजीनियर शशिकांत, पिता रामनाथ तिवारी (उम्र 41 वर्ष) तथा कर्मचारी मदनलाल, पिता गोपालराम सैनी (निवासी गुड़गांव, हरियाणा) को भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत 6-6 माह के सश्रम कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना लगभग 8 वर्ष पूर्व 27 फरवरी 2018 को सुबह करीब 11 बजे घटित हुई थी। खोर स्थित जिप्सन कन्वेयर बेल्ट सीमेंट मील (विक्रम सीमेंट फैक्ट्री) में अन्य मजदूरों के साथ हुकमसिंह नामक मजदूर पेंटिंग के कार्य हेतु ऊपरी साइट पर गया था। कार्य के दौरान अचानक लोहे की प्लेट टूट गई, जिससे हुकमसिंह प्लेट सहित ऊंचाई से जमीन पर आ गिरा। इस भीषण दुर्घटना में आई गंभीर चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। मामले की प्रारंभिक मर्ग जांच एएसआई शिशुपालसिंह गौर द्वारा की गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में यह पाया गया कि पेंटिंग कॉन्ट्रैक्टर के मालिक नित्यानंद बिराना पुजारी, सुपरवाइजर गोपीचंद खटीक, सिविल इंजीनियर शशिकांत तिवारी और कर्मचारी मदनलाल सैनी ने अपने दायित्वों के निर्वहन में भारी लापरवाही बरती थी। जिप्सन कन्वेयर बेल्ट की डेथ प्लेट अत्यंत पुरानी और जर्जर अवस्था में थी, जिसे तत्काल रखरखाव की आवश्यकता थी। इसके बावजूद आरोपियों ने खतरनाक हालात को जानते हुए उस स्थान का वर्क परमिट जारी किया और श्रमिकों को वहां कार्य करने से नहीं रोका। साथ ही, मृतक मजदूर को सुरक्षा के आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इन तमाम लापरवाहियों और उपेक्षा के कारण ही यह जानलेवा हादसा हुआ।
मर्ग जांच के उपरांत चारों आरोपियों के विरुद्ध थाना जावद में अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान पूर्ण किया गया और चालान न्यायालय में पेश किया गया। विचारण के दौरान आरोपी नित्यानंद के फरार होने और गोपीचंद खटीक की मृत्यु हो जाने के कारण, शेष दो आरोपियों मदनलाल और शशिकांत के विरुद्ध सुनवाई जारी रही। एडीपीओ श्री सुखराम गरवाल ने शासन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराए और आरोपियों के दोष को संदेह से परे प्रमाणित किया। न्यायालय ने फैसला सुनाते समय स्पष्ट किया कि औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसी मानवीय भूलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिनका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है।

