बेगूँ में गूंजे वैदिक मंत्र: आदर्श विद्या मन्दिर में विद्यारम्भ संस्कार की भव्यता ने मोहा सबका मन
बेगूँ के आदर्श विद्या मन्दिर में बसंत पंचमी पर आयोजित हुआ भव्य विद्यारम्भ संस्कार। 31 नन्हे विद्यार्थियों ने पंचकुण्डीय हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिक्षा के मार्ग पर कदम रखा। भव्य कलश यात्रा और पाठी-पोथी पूजन ने कार्यक्रम को बनाया यादगार। जानिए कैसे बेगूँ में जीवंत हुई प्राचीन भारतीय परंपरा और ज्ञान की संस्कृति।

बेगूँ। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के पावन पर्व बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूँ स्थित आदर्श विद्या मन्दिर माध्यमिक विद्यालय में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार की गूँज और भक्तिमयी परिवेश के बीच आयोजित 'विद्यारम्भ संस्कार' ने न केवल नन्हे मुन्नों के शैक्षणिक जीवन की नींव रखी, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। यह आयोजन आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच हमारी प्राचीन गौरवशाली परंपराओं को जीवंत करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।
उत्सव का आगाज प्रातःकाल स्थानीय लक्ष्मीनाथ सेठ मन्दिर में पूर्ण विधि-विधान के साथ हुआ। यहाँ मां सरस्वती, श्रीमद्भगवद्गीता एवं पवित्र वैदिक ग्रंथों का पूजन किया गया, जो ज्ञान के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। इसके पश्चात, ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि और जयकारों के बीच एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा नगर के विभिन्न मोहल्लों से होकर गुजरी, जहाँ श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया। कलश यात्रा जब विद्यालय प्रांगण पहुँची, तो वहां का दृश्य किसी दिव्य तपोवन जैसा प्रतीत हो रहा था।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यालय परिसर में आयोजित विशाल पंचकुण्डीय हवन रहा। इस यज्ञ की पवित्र आहुतियों के बीच कुल 31 भैया-बहनों का विद्यारम्भ संस्कार संपन्न हुआ। हवन की अग्नि को साक्षी मानकर इन नन्हे विद्यार्थियों ने ज्ञान के पथ पर अग्रसर होने का संकल्प लिया। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद पाठी-पोथी पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें नवीन छात्रों ने अपनी पाठ्यपुस्तकों का तिलक कर शिक्षा के प्रति आदर भाव व्यक्त किया।
इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह राठौड़, समिति सदस्य गोपाल कृष्ण दाधीच एवं विजय प्रकाश शर्मा सहित विद्यालय परिवार के समस्त सदस्य और भारी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। आयोजन का समापन एक अत्यंत प्रेरणादायी वातावरण में हुआ, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि संस्कारों का बीजारोपण है।

Pratahkal Bureau
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