हिन्दी शीर्षक: हिन्दुस्तान जिंक की 'सखी' पहल का विस्तार, ब्लिंकिट पर उपलब्ध हुआ 'दायची' ब्रांड
सबटाइटल: राजस्थान की 26,800 ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित एफएमसीजी उत्पाद अब दिल्ली-एनसीआर के रिटेल स्टोर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।

। भारत की एकमात्र और विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी, हिन्दुस्तान जिंक ने अपनी महत्वाकांक्षी 'सखी' पहल के माध्यम से राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता के शिखर पर पहुँचाते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा संचालित विशिष्ट ब्रांड 'दायची' ने अब दिल्ली-एनसीआर के प्रतिष्ठित 'मॉर्डन बाज़ार' स्टोर्स और 'ब्लिंकिट' जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा ली है। 'दायची: द बेस्ट फ्रॉम रूरल इण्डिया' ब्रांड के अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले एफएमसीजी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश की जाती है, जिसमें शुद्ध शहद, हस्तनिर्मित अचार, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी सम्मिलित हैं। इन समस्त उत्पादों का निर्माण और प्रबंधन पूरी तरह से ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जाता है। संगठित रिटेल क्षेत्र में हुआ यह विस्तार जमीनी स्तर के उत्पादकों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रहा है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने कहा कि कंपनी का मूल लक्ष्य महिलाओं के नेतृत्व वाले इन सूक्ष्म उद्योगों को मुख्यधारा के बाजार से एकीकृत करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि 'दायची' का बड़े रिटेल स्टोर्स और ब्लिंकिट पर उपलब्ध होना ग्रामीण समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। हिन्दुस्तान जिंक के ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के अंतर्गत 'सखी' पहल ने फेडरेशन, ग्राम संगठन, स्वयं सहायता समूह और एमएसएमई जैसे संस्थानों के माध्यम से अब तक 26,800 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया है। इसके अतिरिक्त, 300 से अधिक सखी नेतृत्व वाली समितियाँ और फेडरेशन प्रबंधक, निगरानी, आजीविका संवर्धन और जागरूकता निर्माण के जरिए सामुदायिक संस्थानों को मजबूती प्रदान कर जमीनी स्तर के नेतृत्व को विकसित कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 में मात्र 5 सिलाई यूनिट्स, 81 महिलाओं और 86 उत्पादों से शुरू हुआ यह माइक्रोएंटरप्राइज प्रोग्राम आज विशाल स्वरूप ले चुका है। वर्तमान में यह 14 प्रोडक्शन यूनिट्स तक विस्तृत हो गया है, जिसमें 400 से अधिक महिलाएँ फूड और टेक्सटाइल श्रेणी के 300 से अधिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इस प्रगति का परिणाम यह रहा कि वित्त वर्ष 2026 में इस पहल ने 2.60 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस ब्रांड ने अपना समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'हार्ट्स विथ फिंगर्स' भी लॉन्च किया है, जो अमेज़न, फ्लिपकार्ट और ओएनडीसी जैसे बड़े मार्केटप्लेस पर अपनी सशक्त मौजूदगी के साथ ग्राहकों तक पहुँच बना रहा है।
'सखी' परियोजना की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है, जिसके तहत इसे चार प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इनमें महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु 'बिजनेस वर्ल्ड' और 'स्कोच' जैसे सम्मान शामिल हैं। इस पहल ने आईआईटीएफ, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और 'उपाया' के तहत अपने टेक्सटाइल कलेक्शन के माध्यम से वैश्विक पहचान बनाई है। हाल ही में मुंबई के प्रसिद्ध 'काला घोड़ा फेस्टिवल' में पहली बार हिस्सा लेकर सखी महिलाओं के उत्पादों ने उपभोक्ताओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। क्विक कॉमर्स के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए मॉर्डन बाजार और ब्लिंकिट के साथ यह रणनीतिक जुड़ाव महिलाओं द्वारा संचालित व्यवसायों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा। दिल्ली-एनसीआर में सफल लॉन्च के बाद अब इस पहल का लक्ष्य अन्य प्रमुख बाजारों में विस्तार करना है। हिन्दुस्तान जिंक अपनी सामाजिक पहलों के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में 2,300 से अधिक गाँवों के 23 लाख लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हुए समावेशी विकास के प्रति पूर्णतः समर्पित है।

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