चित्तौड़गढ़ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 के तहत प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सोमवार को जिला कलक्टर डॉ. मंजू की अध्यक्षता में जनसुनवाई आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरु शामिल हुए। इस दौरान यूसीसी को लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए। कई संगठनों और प्रतिनिधियों ने यूसीसी पर सहमति जताते हुए अपने सुझाव दिए, जबकि कुछ लोगों ने इस पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई।

जनसुनवाई के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी ने पूरी प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए बैठक में भाग नहीं लिया और जनसुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर जनसुनवाई कराने से पहले उसका आधिकारिक ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है। उनका कहना था कि जब तक लोगों को यह जानकारी नहीं होगी कि प्रस्तावित कानून में क्या प्रावधान हैं, तब तक वे सही तरीके से अपने सुझाव या आपत्तियां कैसे दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि कानून का ड्राफ्ट पहले सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि आमजन उसे पढ़कर अपनी राय तैयार कर सकें। कांग्रेस का कहना है कि बिना ड्राफ्ट जारी किए जनसुनवाई कराना केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है और इससे लोगों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाती। इसी कारण कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जनसुनवाई का बहिष्कार किया।

भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रतन गाडरी ने कहा कि समान नागरिक संहिता कानून को पूरे देश की जनता चाहती है। उनका कहना था कि एक देश में एक कानून होना चाहिए और संविधान के तहत सभी नागरिकों को, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, समान अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से आमजन से सुझाव मांगना एक अच्छी पहल है। जनसुनवाई में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने अपने-अपने सुझाव दिए और उन्होंने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए रतन गाडरी ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा देश की विचारधारा से अलग है। उन्होंने कहा कि देश की जनता उन्हें पहले ही नकार चुकी है, इसलिए वे इसका विरोध करेंगे। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस को किसी बात पर आपत्ति या सुझाव था तो उन्हें जनसुनवाई में शामिल होकर अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि यदि कांग्रेस समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं करेगी तो एक वर्ग विशेष के वोट उनके खिलाफ हो जाएंगे, इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह उनका व्यक्तिगत मानना है, बाकी वे स्वयं बेहतर जानते हैं।

अरावली जल पर्यावरण सेवा संस्थान एवं संरक्षक अध्यक्ष डॉ. भगवत सिंह तंवर ने कहा कि यूसीसी की जनसुनवाई में उन्होंने सरकार की ओर से दिए गए 19 सुझावों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि इनमें से उन्हें केवल एक सुझाव उचित नहीं लगा। उनका कहना था कि बहुविवाह नहीं होना चाहिए, एक ही पत्नी हो, उसके पूरे अधिकार हों और बच्चों का भी समुचित पालन-पोषण हो, क्योंकि बहुविवाह से विवाद उत्पन्न होते हैं।

डॉ. तंवर ने कहा कि पर्सनल लॉ व्यक्ति के घर तक सीमित है, लेकिन घर से बाहर आने पर पब्लिक लॉ सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान के मौलिक अधिकारों में समानता का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है और यूसीसी उसी का विस्तार है। उनके अनुसार इसमें विरोध की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन व्यवस्था में सभी बराबर थे। उन्होंने सरकार द्वारा यूसीसी पर जनसुनवाई आयोजित करने को अच्छी पहल बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए यह आवश्यक कदम है और यह संविधान के समानता के अधिकार का विस्तार है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन भी आवश्यक है। इस कार्य में उनकी संस्था और अन्य गैर-सरकारी संगठन सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

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