उदयपुर बर्ड फेस्टिवल: सात समंदर पार से आए 'विदेशी मेहमानों' ने मोहा मन, भूपालसागर में पक्षी प्रेमियों ने निहारा कुदरत का करिश्मा
12वें उदयपुर बर्ड फेस्टिवल के तहत भूपालसागर और मातृकुंडिया बांध पर पक्षी प्रेमियों का जमावड़ा लगा। साइबेरिया और यूरोप से आए दुर्लभ विदेशी पक्षियों जैसे रोजी पेलिकन, बार-हेडेड गूज़ और टफ़्टेड डक की अठखेलियों ने सभी का मन मोह लिया। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर उज्जवल दाधीच के नेतृत्व में 52 सदस्यीय दल ने फील्ड विजिट की। जानिए कैसे सात समंदर पार कर मेवाड़ की झीलों में पहुंचे ये नन्हे मेहमान और क्यों खास रही बर्ड रेस प्रतियोगिता।

भूपालसागर/चित्तौड़गढ़: मेवाड़ की धरा पर प्रकृति और पक्षी प्रेम के अनूठे संगम का गवाह बना भूपालसागर बांध, जहाँ शनिवार को विदेशी परिंदों की कलरव ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। उदयपुर वन विभाग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 12वें उदयपुर बर्ड फेस्टिवल के दूसरे दिन प्रकृति प्रेमियों और विशेषज्ञों का एक दल दुर्लभ पक्षियों के दीदार के लिए भूपालसागर और मातृकुंडिया बांध पहुंचा। यहाँ हजारों मील का सफर तय कर आए विदेशी पक्षियों की अठखेलियां देख दल के सदस्य रोमांचित हो उठे।
फील्ड विजिट का आगाज और भव्य स्वागत
इस विशेष फील्ड विजिट की शुरुआत उदयपुर से हुई, जहाँ सुबह 6:00 बजे मुख्य वन संरक्षक (CCF) सेडूराम यादव और डीएफओ यागवेंद्र सिंह चुंडावत ने 52 सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर उज्जवल दाधीच के नेतृत्व में जब यह दल भूपालसागर पहुंचा, तो वहां एक उत्सवी माहौल देखने को मिला।
स्थानीय सरपंच प्यार चंद भील, पंचायत समिति सदस्य सुरेश गाडरी और अंकुर जोशी ने राजस्थानी परंपरा के अनुसार दल प्रभारी उज्जवल दाधीच, डॉ. हेमलता लोहार और वनरक्षक राजेंद्र मीणा का उपरना ओढ़ाकर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर सरपंच भील ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जैव विविधता का संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
साइबेरिया से मेवाड़: अस्तित्व की उड़ान
दल का नेतृत्व कर रहे पक्षीविद् उज्जवल दाधीच ने वहां उपस्थित विद्यार्थियों और सदस्यों को इन पक्षियों के प्रवास के पीछे की वैज्ञानिक और भौगोलिक वजहें समझाईं। उन्होंने बताया कि इस समय मध्य एशिया, साइबेरिया, अफगानिस्तान और यूरोप के कई देशों में भारी बर्फबारी होती है, जिससे वहां भोजन और आवास का संकट खड़ा हो जाता है। अस्तित्व बचाने के लिए ये पक्षी हजारों किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय कर भारत की झीलों में शरण लेते हैं।
रोजी पेलिकन और टफ़्टेड डक का आकर्षण
अवलोकन के दौरान बांध के पानी में विदेशी पक्षियों की जलक्रीड़ा आकर्षण का केंद्र रही।
- रोजी पेलिकन (Rosy Pelican): आकाश में इनकी ऊंची उड़ान और सामूहिक विचरण ने सभी का ध्यान खींचा।
- जलक्रीड़ा: लिटिल ग्रीब (Little Grebe) और टफ़्टेड डक (Tufted Duck) की पानी में डुबकियां और अठखेलियां देख पर्यटक मंत्रमुग्ध हो गए।
- दुर्लभ प्रजातियां: दल ने सारस क्रेन, बार हेडेड गूज़ (Bar-headed Goose), ग्रे लेग गूज, कॉमन पोचार्ड, रिवर टर्न, पिनटेल और रंग-बिरंगे किंगफिशर को अपने कैमरों और दूरबीन में कैद किया।
बर्ड रेस: रोमांच का दूसरा नाम
महोत्सव के तहत आयोजित 'बर्ड रेस' प्रतियोगिता ने इस विजिट को और भी रोमांचक बना दिया। इस दौरान रफ (Ruff) और सैंडपाइपर (Sandpiper) जैसे पक्षियों को ढूंढना और पहचानना प्रतिभागियों के लिए विशेष चुनौती और आकर्षण का विषय रहा। प्रख्यात पक्षीविदों ने इस रेस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
तीन दिवसीय उदयपुर बर्ड फेस्टिवल का यह आयोजन केवल पक्षी दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आमजन और विशेषकर युवा पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने का एक सशक्त माध्यम है। भूपालसागर में विदेशी मेहमानों की मौजूदगी यह बताती है कि यदि हम अपने जल स्रोतों और पर्यावरण को सुरक्षित रखें, तो प्रकृति हमें अपने सबसे खूबसूरत रूपों से रूबरू कराती रहेगी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
