राजस्थान शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण-पदोन्नति सहित लंबित मांगों पर सकारात्मक आश्वासन
राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण, पदोन्नति और शिक्षा विभाग की विभिन्न लंबित मांगों पर अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ हुई अहम वार्ता में बड़ा आश्वासन मिला।

तस्वीर में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा राजेश यादव और शैक्षिक महासंघ का प्रतिनिधिमंडल विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बैठक करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
बड़ी सादड़ी। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रतिनिधिमंडल की अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा राजेश यादव के साथ विभिन्न लंबित मांगों को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता संपन्न हुई। प्रदेशाध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में हुई इस बैठक में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति सहित शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी बिंदुओं पर सकारात्मक पहल करते हुए शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया।
संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि वार्ता के दौरान माध्यमिक शिक्षा में स्टाफिंग पैटर्न लागू कर वर्ष 2019-2020 से 2025-2026 तक क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों का शीघ्र आवंटन, शिक्षकों से विभिन्न प्रकार की वसूलियों पर रोक लगाने तथा पे-प्रोटेक्शन प्रदान करने, जी.पी.एफ./एस.आई. ऋण एवं उपार्जित अवकाशों के नगद भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने, शालादर्पण एवं अन्य पोर्टलों का गुणवत्तापूर्ण विकास कर समस्त सूचनाएं शालादर्पण से ही प्राप्त किए जाने तथा 33,000 संविदा शिक्षकों को प्रबोधकों की भांति नियमित किए जाने की मांग रखी गई।
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किए जाने, 31 दिसंबर के बाद नियुक्त शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति से सभी परिलाभ दिए जाने के लिए वेतन भुगतान हेतु विकल्प पत्र की बाध्यता में शिथिलता प्रदान करने के आदेश जारी करने तथा राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए कंप्यूटर अनुदेशक कैडर के सुदृढ़ीकरण एवं कैडर संशोधन समिति के निर्णय को लागू करने की भी मांग उठाई।
बैठक में शिक्षकों के सभी संवर्गों की पदोन्नति किए जाने, विशेष रूप से छह सत्रों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला उच्चतम न्यायालय में शीघ्र सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर मार्ग प्रशस्त कराने, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को पुनर्स्थापना का विकल्प देने तथा शिक्षा विभाग में नए जिलों के गठन के बाद शिक्षकों एवं कार्मिकों की वरिष्ठता यथावत रखने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
संगठन ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी एक ही पारी में लगाने तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा के शिक्षकों से भी परीक्षा कार्य में सहयोग लेने, समसा द्वारा दी जाने वाली ग्रांट, प्रशिक्षण, पाठ्यपुस्तक एवं खेलकूद सामग्री का वार्षिक कैलेंडर जारी करने, शिक्षक कल्याण बोर्ड का गठन करने, संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने तथा एमडीएम योजना के अंतर्गत बाल गोपाल योजना में दूध पाउडर के स्थान पर पशुपालकों से दूध खरीदकर उपलब्ध कराने और मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ दिए जाने की मांग भी रखी।
इसके साथ ही शिक्षा विभाग में पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने तथा तृतीय वेतन श्रृंखला के शिक्षकों सहित शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालय अध्यक्ष एवं प्रयोगशाला सहायकों के स्थानांतरण किए जाने का विषय भी वार्ता में शामिल रहा।
वार्ता में शासन की ओर से उपशासन सचिव मोनिका बराला, निदेशक संस्कृत शिक्षा विभाग प्रियंका जोधावत तथा शिक्षा सलाहकार बी.के. गुप्ता उपस्थित रहे। संगठन की ओर से प्रदेशाध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संपत सिंह, अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल तथा कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा ने भाग लिया। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस वार्ता के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा ने सभी बिंदुओं पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

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