चित्तौड़गढ़ में परिवहन नियमों की उड़ी धज्जियां: श्रद्धा के सैलाब में जोखिम पर रही जिंदगियां
चित्तौड़गढ़ में नववर्ष पर श्री सांवरिया जी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के दौरान परिवहन नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। निजी स्कूलों की बाल वाहिनी बसों और शहर के ऑटो ने परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर श्रद्धालुओं को असुरक्षित तरीके से ढोया। प्रशासन की चुप्पी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल। क्या होगी दोषियों पर सख्त कार्रवाई?

चित्तौड़गढ़। नववर्ष के उल्लास और आस्था के संगम के बीच जिला मुख्यालय से लेकर श्री सांवरिया जी के पावन धाम तक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नए साल के अवसर पर श्री सांवरिया जी के दर्शन हेतु उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने जहां एक ओर धार्मिक उत्साह को दर्शाया, वहीं दूसरी ओर निजी बस संचालकों और ऑटो चालकों की लापरवाही ने सड़क सुरक्षा और कानून को कटघरे में खड़ा कर दिया। नववर्ष के इस विशेष अवसर पर निजी स्कूलों के लिए आरक्षित बाल वाहिनी बसों और नगर परिषद सीमा में संचालित होने वाले तिपहिया ऑटो का जमकर दुरुपयोग किया गया, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में रही।
नियमों की इस खुली अनदेखी की शुरुआत उन बाल वाहिनी बसों से हुई, जिन्हें परिवहन विभाग द्वारा केवल निजी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को लाने और ले जाने के लिए विशेष परमिट जारी किया जाता है। इन बसों के संचालन की शर्तें अत्यंत सख्त होती हैं और इनका उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए ही सुनिश्चित है। इसके बावजूद, कुछ निजी बस संचालकों ने अधिक कमाई के लालच में इन बसों को नियमों के विपरीत चित्तौड़गढ़ से श्री सांवरिया जी मार्ग पर श्रद्धालुओं के परिवहन के लिए झोंक दिया। यह न केवल परमिट की शर्तों का घोर उल्लंघन है, बल्कि उन सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी है जो विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं।
विपदा का दौर यहीं समाप्त नहीं हुआ। शहर की सड़कों पर चलने वाले तीन पहिया ऑटो, जिन्हें केवल नगर परिषद सीमा क्षेत्र के भीतर ही सवारी ढोने की अनुमति प्राप्त है, वे भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहे। नियमों को ताक पर रखते हुए कई ऑटो चालकों ने शहर की सीमाएं लांघकर सांवरिया जी मार्ग पर लंबी दूरी के फेरे लगाए। सबसे गंभीर स्थिति तब देखने को मिली जब इन ऑटो में क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बैठाकर उन्हें असुरक्षित तरीके से ले जाया गया। स्थानीय नागरिकों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब सड़कों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही थीं, तब परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की निगरानी पूरी तरह निष्प्रभावी नजर आई।
कार्रवाई के अभाव ने नियम तोड़ने वाले संचालकों के हौसलों को और अधिक बुलंद कर दिया है। अब यह बड़ा सवाल प्रशासन के सामने खड़ा है कि क्या भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाओं को रोकने के लिए बाल वाहिनी बसों और गैर-कानूनी ढंग से संचालित हो रहे ऑटो चालकों के विरुद्ध कोई कठोर कदम उठाए जाएंगे। क्या जिम्मेदार विभाग इस लापरवाही का संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर चित्तौड़गढ़ की सड़कों पर परिवहन नियमों की यह बलि यूं ही दी जाती रहेगी? इस घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि लाभ की अंधी दौड़ में सुरक्षा को किस कदर हाशिए पर धकेल दिया गया है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
