बस्सी में तीन दिनों से जारी गतिरोध समाप्त: परिजनों ने स्वीकार किया समझौता, भारी पुलिस जाप्ते के बीच हुआ अंतिम संस्कार
चित्तौड़गढ़ के बस्सी में पालका फोरलेन हादसे के बाद 3 दिनों से जारी धरना समाप्त हुआ। रणजीत गाड़ियां लौहार की मौत के बाद प्रशासन और परिजनों के बीच 1 लाख रुपये मुआवजे, पट्टे और नौकरी पर सहमति बनी। 4 थानों की पुलिस की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम। पूरी खबर पढ़ें।

बस्सी (चित्तौड़गढ़)। पालका फोरलेन चौराहे पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद उपजा जनाक्रोश आखिरकार 72 घंटों के लंबे इंतजार और मैराथन वार्ताओं के बाद शांत हुआ। न्याय की मांग को लेकर अड़े परिजनों और समाज के लोगों ने प्रशासन द्वारा ठोस आश्वासन मिलने के बाद शव उठाया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी रही और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चार थानों की पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
घटना की शुरुआत मंगलवार शाम करीब 4 बजे हुई, जब पालका फोरलेन के समीप एक अज्ञात वाहन ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस हृदयविदारक हादसे में बाइक सवार रणजीत, पुत्र कालू गाड़ियां लौहार, की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद चालक वाहन समेत फरार हो गया, जिससे आक्रोशित होकर गाड़ियां लौहार समाज के लोग और ग्रामीण धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी और परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया जाएगा।
करीब 36 घंटों तक चले इस कड़े संघर्ष और धरने के बाद, गुरुवार को प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति का रास्ता साफ हुआ। उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते के तहत मृतक रणजीत के परिवार को एक लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत की ओर से परिवार को एक आवासीय प्लॉट (पट्टा) आवंटित करने, सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का लिखित आश्वासन दिया गया।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद परिजनों ने आंदोलन समाप्त किया, जिसके उपरांत पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे अंतिम विदाई के लिए सौंपा। इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए बस्सी, बिजयपुर, साड़ास और चंदेरिया थानों का भारी पुलिस जाप्ता मौके पर तैनात रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। अज्ञात वाहन की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को दर्शाती है, बल्कि पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए समाज के एकजुट संघर्ष की एक मिसाल भी पेश करती है।

Pratahkal Bureau
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