निंबाहेड़ा के सरकारी स्कूलों की छतों पर अब चमकेगा सूरज: नीति आयोग ने 251 लाख के मेगा सोलर प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी
नीति आयोग ने निंबाहेड़ा ब्लॉक के 80 सरकारी स्कूलों के लिए 251 लाख रुपये के सोलर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। विधायक श्रीचंद कृपलानी की अनुशंसा पर स्वीकृत इस योजना से स्कूलों को बिजली बिलों में सालाना 18 लाख की बचत होगी। जानिए कैसे यह प्रोजेक्ट चित्तौड़गढ़ के शिक्षा क्षेत्र में सौर क्रांति लाएगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती प्रदान करेगा।

निंबाहेड़ा। शिक्षा के मंदिर अब न केवल ज्ञान की रोशनी से महकेंगे, बल्कि सौर ऊर्जा की शक्ति से आत्मनिर्भर भी बनेंगे। पिछड़े क्षेत्रों के कायाकल्प के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'आशान्वित ब्लॉक कार्यक्रम' के तहत चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा ब्लॉक ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग की 48वीं एंपावर्ड कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक में निंबाहेड़ा के 80 सरकारी विद्यालयों के लिए 251 लाख रुपये के सोलर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंस में विकास के एक नए अध्याय की पटकथा लिखी गई, जिसमें निंबाहेड़ा देश के मानचित्र पर नवाचार के केंद्र के रूप में उभरा है।
इस ऐतिहासिक निर्णय के पीछे पूर्व यूडीएच मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक श्रीचंद कृपलानी की दूरगामी सोच और अनुशंसा ने मुख्य भूमिका निभाई। बैठक के दौरान चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर आलोक रंजन, मुख्य आयोजना अधिकारी विक्रम पोसवाल और नीति आयोग के एबीएफ राधाकिशन शर्मा ने जिले का पक्ष मजबूती से रखा। जिला कलेक्टर ने अवगत कराया कि 7 जनवरी 2023 को शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ से एकमात्र निंबाहेड़ा ब्लॉक का चयन इसकी प्रगति और संभावनाओं को देखते हुए किया गया था। अब इस विशेष बजट की स्वीकृति के बाद ब्लॉक के शैक्षणिक ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आना तय है।
परियोजना के तकनीकी विवरण के अनुसार, कुल 2 करोड़ 51 लाख 12 हजार रुपये की लागत से 80 विद्यालयों की छतों पर सौर ऊर्जा पैनल स्थापित किए जाएंगे। विधायक श्रीचंद कृपलानी ने बताया कि योजना के अंतर्गत 52 विद्यालयों में 5 केवी और 28 विद्यालयों में 3 केवी क्षमता के पैनल लगाए जाएंगे। इस पहल से विद्यालयों के बिजली बिलों में सालाना लगभग 18 लाख रुपये की भारी बचत होगी। इस राशि का पुनर्विनियोग विद्यालयों के अन्य विकास कार्यों और छात्रों की शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक लक्ष्य में भी अपना योगदान देगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट से लाभान्वित होने वाले विद्यालयों की सूची में रानीखेड़ा, जावदा द्वितीय (पीएम श्री), केली, मिन्नाना, बडौली घाटा, मंडला चारण, अरनोदा, बाड़ी, मरजीवी, सतखंडा, कनेरा, कदमाली, बिनोता, गुड़ा खेड़ा, फलवा, बडौली माधोसिंह, कोटडी कला, भावलीया, सेमलिया, साकरिया, जलियां, अरनिया जोशी (महात्मा गांधी), बोरखेड़ी, ढोरिया, सरसी, फाचर अहिरान, अरनिया माली, पायरी, लसडावन, बड़ावली, बांसा, बांगेड़ा मामादेव, मांगरोल, डला किशनपुरा, साजनपुर, गादोला, बांगेड़ाघाटा, मेलाना, श्रीपुरा, रठांजना, टाई, ऊंखलिया, निम्बोदा, चरलिया ब्राह्मण, बरवाड़ा, लुनखंदा, धीनवा, भगवानपुरा, राजकीय बालिका विद्यालय कनेरा व ढोरिया और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बरड़ा जैसे संस्थान शामिल हैं जहाँ 5 केवी के पैनल लगेंगे। वहीं, मांगरोल, धनोरा, ऊंचा, सेगवा, मुरलिया, रावलिया, चांदखेड़ा, कल्याणपुरा, करताना, सरलाई, मनोहरखेड़ी, पिपलिया कला, मोहम्मदपूरा, निंबोदा की ढाणी, कोचवा, सांड, विरिया खेड़ी, मडडा गुलफ़रोशन, सगवाड़िया, मंडावली, सांगरिया, टाटारमाला, सापलिया, भुज्याखेडी, चरलिया मेवासा, नरसिंहगढ़ और रसूलपुरा (वंडर सीमेंट स्कूल) में 3 केवी के पैनल स्थापित होंगे।
विधायक कृपलानी ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, नीति आयोग के सहयोग और सांसद सीपी जोशी के प्रयासों को देते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना बच्चों को हरित ऊर्जा के प्रति जागरूक करेगी और निंबाहेड़ा को एक 'सस्टेनेबल' मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।

