चित्तौड़गढ़। सालवी समाज पंच मेवाड़ा सुधार समिति चौखला चंदेरिया की पुठोली स्थित लालबाई फूलबाई धर्मशाला में आयोजित प्रत्येक अमावस की बैठक इस बार विशेष रूप से आमसभा के रूप में संपन्न हुई। सैंकड़ों समाजजन उपस्थित रहे और सामूहिक निर्णय के लिए सामाजिक मुद्दों पर गंभीर विमर्श किया गया।

आमसभा में समाज के पंचों ने सर्वसम्मति से तीन अहम प्रस्ताव पारित किए। सबसे पहले, मृत्युभोज में अनावश्यक व्यय और अत्यधिक व्यंजनों की प्रथा को समाप्त करते हुए अब केवल एक मिठाई बनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही धोवरा प्रथा को पूर्ण रूप से बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। तीसरे प्रस्ताव के तहत विवाह समारोह में सोने और चांदी की मात्रा पर सीमित नियम लागू किए गए हैं, जिसके अनुसार केवल दो तोला सोना और आधा किलो चांदी ही विवाह उत्सव में शामिल किया जा सकेगा।

सामाजिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए यह भी तय किया गया कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों की समाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी नहीं मानी जाएगी। आमसभा में उपस्थित पंचों में मदनलाल सालवी, मन्नालाल, रतनलाल, किशनलाल, कालूराम, हंसराज, राजेंद्र, रोशनलाल, उदयराम, बख्तावरलाल, गोवर्धनलाल, देवीलाल, सागर, नानूराम, नंदलाल, नारायणलाल, मांगीलाल, अम्बालाल, लालू, बालूलाल, डालचंद, सोहन, हजारीलाल, श्यामलाल, छगनलाल, उंकारलाल, गोपाललाल, रामचंद्र, लादूलाल सहित 52 गांवों के सैकड़ों समाजजन मौजूद रहे।

इस आमसभा द्वारा लिए गए निर्णय समाज में सामाजिक और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लिए गए हैं। मृत्युभोज और विवाह समारोहों में सीमाओं का निर्धारण केवल खर्च को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परंपराओं में सामजिक सुधार और समाजिक समानता को भी बढ़ावा देता है। इस ऐतिहासिक निर्णय से सालवी समाज में सामाजिक समरसता और अनुशासन को मजबूती मिलेगी।

Pratahkal Bureau

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