चित्तौड़गढ़। महेश वाटिका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां स्व. हर्कलाल बाहेती की स्मृति में कृष्णा देवी, राजकुमार एवं गोपाल बाहेती परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा परिसर भक्तिरस से सराबोर रहा और जयकारों के बीच आध्यात्मिक वातावरण सजीव हो उठा।

कथा व्यास आचार्य पं. मिथिलेश नागर ने प्रवचनों में प्रार्थना की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रार्थना आत्मबल प्रदान करती है और प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन चार से छह मिनट ईश्वर स्मरण अवश्य करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित साधना का संकल्प भी दिलाया। अपने ओजस्वी संबोधन में आचार्य नागर ने भारत की सांस्कृतिक एकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारत माता की संतान है। संगीतात्मक प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने देशभक्ति का संदेश भी दिया, जिससे श्रोता भावविभोर हो उठे।

कथा के क्रम में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की कथाओं का सजीव वर्णन किया गया। राम जन्म की कथा के पश्चात श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वाचन हुआ, जिसके साथ ही कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन उत्सवधर्मिता के साथ किया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का वर्णन हुआ, पूरा पंडाल भक्ति गीतों और जयघोष से गूंज उठा।

इस अवसर पर प्रशासनिक संत राकेश पुरोहित ने भी कथा में सहभागिता करते हुए समाज को गौसेवा के प्रति अधिक जागरूक रहने का संदेश दिया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की धार्मिक और सामाजिक महत्ता और भी सशक्त रूप में सामने आई। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश भी दे गया।

Pratahkal Bureau

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