कांकरवा में गूंजा 'कर्तव्य परमो धर्म' का शंखनाद: शिक्षक संघ ने मनाया कर्तव्य बोध दिवस
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) उपशाखा भूपालसागर द्वारा कांकरवा के पीएम श्री मोड़सिंह चौहान विद्यालय में 'कर्तव्य बोध दिवस' का भव्य आयोजन किया गया। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य प्रहलाद राय मण्डोवरा और अन्य वक्ताओं ने शिक्षकों व छात्रों को अनुशासन, सात्विक जीवन और नि:स्वार्थ कर्म की प्रेरणा दी। राष्ट्र निर्माण और व्यक्तिगत दायित्वों पर केंद्रित इस विशेष रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ें।

कांकरवा (चित्तौड़गढ़)। राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका और व्यक्तिगत जीवन में कर्तव्यों के महत्व को रेखांकित करने के लिए राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) उपशाखा भूपालसागर द्वारा एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 'कर्तव्य बोध पखवाड़े' के अंतर्गत पीएम श्री मोड़सिंह चौहान राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कांकरवा के परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने अनुशासन, राष्ट्रवाद और सात्विक जीवन शैली की एक नई अलख जगाई। अध्यापन के साथ-साथ चारित्रिक उत्थान के संकल्प के साथ शुरू हुई इस संगोष्ठी ने उपस्थित जनसमूह को अपने दायित्वों के प्रति सजग होने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उपशाखा अध्यक्ष सुबेसिंह ने वैचारिक विमर्श की शुरुआत की। उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि एक आदर्श समाज की रचना तभी संभव है जब व्यक्ति फल की चिंता किए बिना नि:स्वार्थ भाव से अपने कर्म पथ पर अग्रसर रहे। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य प्रहलाद राय मण्डोवरा ने शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सेतु का कार्य करते हुए स्वस्थ जीवन शैली पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों को समय की पाबंदी और अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए सात्विक जीवन जीने का आह्वान किया, ताकि वे भावी पीढ़ी के लिए जीवंत उदाहरण बन सकें।
ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद संदर्भों को जोड़ते हुए उप प्राचार्य मुरलीधर शर्मा ने स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस और जीवन दर्शन से छात्रों को रूबरू करवाया। इसी क्रम में कांकरवा विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जीवन-मृत्यु और कर्म के गूढ़ रहस्यों पर अपना बौद्धिक संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने मार्मिक ढंग से समझाया कि 'कर्म ही जीवन है' और व्यक्ति के कर्म उसका साथ कभी नहीं छोड़ते; मृत्यु केवल एक बार आती है, परंतु जीवन जीने का अवसर हमें हर सुबह मिलता है। जिला सचिव प्राथमिक शिक्षा सत्यनारायण भट्ट ने 'कर्म ही पूजा है' के मूल मंत्र को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।
इस गरिमामय आयोजन में पर्यवेक्षक उदय लाल अहीर और विकास कुमार आचार्य, कोषाध्यक्ष गोपाल जाट, उपाध्यक्ष रोहित मीणा, प्रधानाध्यापक गोपाल कृष्ण मेनारिया, प्रधानाध्यापक प्रदीप मीणा और रामेश्वर लाल जाट सहित उपशाखा के समस्त दायित्ववान कार्यकर्ताओं और स्थानीय शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संचालन रमाकांत त्रिपाठी ने किया, जबकि उपशाखा मंत्री महेश चंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। यह संगोष्ठी न केवल एक औपचारिक आयोजन रही, बल्कि इसने शिक्षा जगत को कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के पथ पर चलने के लिए पुन: ऊर्जा प्रदान की।

Pratahkal Bureau
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