भारतीय सैन्य इतिहास के स्वर्णिम अध्याय विजय दिवस की 55वीं वर्षगांठ पर सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ देशभक्ति, अनुशासन और शौर्य की अनुपम मिसाल बनकर उभरा। 16 दिसंबर 1971 की ऐतिहासिक विजय को समर्पित यह आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जहां भारतीय सेना के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा की भावना को पूरे सम्मान के साथ स्मरण किया गया। कार्यक्रम ने कैडेट्स, पूर्व सैनिकों और गणमान्य नागरिकों को देश के गौरवशाली सैन्य इतिहास से भावनात्मक रूप से जोड़ा।

विद्यालय के शंकर मेनन सभागार में आयोजित इस विशेष समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर मुख्य अतिथि तथा भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन पर विद्यालय के प्राचार्य कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया, उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव एवं प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी. श्रीकुमार ने पारंपरिक सैन्य शिष्टाचार के साथ स्वागत किया। कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर ने आयोजन की गरिमा को और ऊंचा किया।

मुख्य अतिथि ने विद्यालय परिसर स्थित स्मृतिका पर पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया। यह क्षण उपस्थित सभी जनों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी रहा। इसके पश्चात शंकर मेनन सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। कैडेट अंश बिलवाल ने अतिथियों का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया।

समारोह के दौरान 1971 के भारत–पाक युद्ध और बांग्लादेश की मुक्ति पर आधारित एक प्रेरक लघु डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को उस ऐतिहासिक विजय के गौरवपूर्ण क्षणों की पुनः अनुभूति कराई। इसके बाद कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभागार को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। गणेश वंदना, देशभक्ति गीतों, समूह नृत्य और भावनात्मक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और कैडेट्स के अनुशासन व प्रतिभा की सर्वत्र सराहना हुई।

मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने संबोधन में विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 16 दिसंबर 1971 भारतीय सैन्य इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस, रणनीति और शौर्य का परिचय देते हुए पाकिस्तान को पराजित किया और 93 हजार सैनिकों का आत्मसमर्पण कराकर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई। उन्होंने भारतीय सेना को विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक बताते हुए कहा कि हमारे सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और उनका बलिदान अमूल्य है।

उन्होंने फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल, कर्नल होशियार सिंह सहित अनेक वीर सेनानायकों का स्मरण किया और कहा कि इन्हीं के साहस और नेतृत्व ने भारत को यह ऐतिहासिक विजय दिलाई। दिलावर ने राजस्थान सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान में किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए सरकारी सेवाओं में उन्हें अवसर प्रदान करने की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने महाराणा प्रताप की पावन धरती को नमन करते हुए सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ की भूमिका की प्रशंसा की, जो प्रदेश के युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के लिए तैयार कर रहा है।

उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं—पद्मिनी हाउस, लैंग्वेज लैब, अत्याधुनिक पुस्तकालय, रोबोटिक लैब, स्पोर्ट्स एरीना, आर्चरी रेंज और एयर राइफल शूटिंग रेंज—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संसाधन कैडेट्स के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में बालिका सैनिक स्कूलों की स्थापना के निर्णय की भी उन्होंने सराहना की और बीकानेर में स्थापित पहले बालिका सैनिक स्कूल के लिए दानदाता पूनमचंद राठी के योगदान का उल्लेख किया।

विशिष्ट अतिथि कर्नल देव आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि 1971 की विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्रालय के प्रयासों से आज महिलाएं भी भारतीय सेना में साहस और शौर्य के साथ अपनी भूमिका निभा रही हैं, जो राष्ट्रीय गर्व का विषय है। उन्होंने राजस्थान को सैनिकों के कल्याण के लिए अग्रणी प्रदेश बताते हुए दुर्घटना की स्थिति में सरकारी नौकरी के प्रावधान का उल्लेख किया।

जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि इस अवसर पर अनेक भूतपूर्व सैनिकों और विद्यालय के कर्मचारियों को उनके राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा विद्यालय में नव-निर्मित पेरेंट्स हॉल, जनरल मांधाता एयर राइफल शूटिंग रेंज तथा ब्रिगेडियर रणशेर तीरंदाजी रेंज का लोकार्पण भी किया गया, जिससे कैडेट्स को प्रशिक्षण और खेलकूद के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।

समारोह के अंत में प्राचार्य कर्नल जसरोटिया ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि द्वारा विद्यालय को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। विद्यालय कप्तान कैडेट मयंक विश्वकर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि मंच संचालन कैडेट अंश बिलवाल और प्रियंका ने किया। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर आलोक रंजन, यूआईटी सचिव कैलाश गुर्जर, सीईओ विनय पाठक, शिक्षा विभाग के अधिकारी, सैन्य अधिकारी, पूर्व छात्र, शिक्षक और बड़ी संख्या में कैडेट्स एवं नागरिक उपस्थित रहे।

विजय दिवस का यह आयोजन न केवल सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ की गौरवशाली परंपरा को रेखांकित करता है, बल्कि राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन के मूल्यों को नई पीढ़ी के मन में और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

Pratahkal Bureau

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