निंबाहेड़ा। श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक, समाजसेवा और संगठनात्मक चेतना के प्रतीक पूज्य श्री तन सिंह जी की 102वीं जयंती रविवार, 25 जनवरी को निंबाहेड़ा में श्रद्धा, उत्साह और वैचारिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर प्रातः 11 बजे श्री राजपूत छात्रावास, बडौली रोड में भव्य जन्म जयंती कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में समाजबंधुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का आयोजन श्री क्षत्रिय युवक संघ, प्रांत चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में किया गया। आयोजन स्थल पर समाज में व्याप्त एकता, संगठन और प्रेरणा का वातावरण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण सिंह बडोली ने किया। प्रारंभ में नरेंद्र सिंह नरधारी द्वारा पूज्य तन सिंह जी के जीवन पर आधारित लेख का वाचन किया गया, जिसे उनकी माता मोती कंवर के कथनों तथा नारायण सिंह रेडा द्वारा लिखित जीवनी के आधार पर प्रस्तुत किया गया। इस वाचन ने उपस्थित जनसमूह को पूज्य तन सिंह जी के संघर्ष, विचार और समाजनिष्ठ जीवन से परिचित कराया।

संघ के केंद्रीय लेखा प्रभारी गंगा सिंह सिजयाली ने सहगान के माध्यम से श्री क्षत्रिय युवक संघ की स्थापना, उद्देश्य और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने भू-स्वामी आंदोलन में पूज्य तन सिंह जी की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए खातेदारी अधिकार दिलाने में उनके निर्णायक योगदान को रेखांकित किया। मानवेन्द्र सिंह चौहान ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में संघ की प्रासंगिकता और युवाओं में संगठन के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में नारायण सिंह बडोली ने राजपूत समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा करते हुए उनके समाधान के व्यावहारिक उपाय सुझाए। मातृशक्ति की ओर से पवन शेखावत ने महिलाओं और बालिकाओं को संघ से जोड़ने, बालिका शिक्षा और संस्कार निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य वक्ता लक्ष्मी कुमारी ने पूज्य तन सिंह जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ प्रमुख की आयु मात्र 55 वर्ष थी, किंतु उन्होंने समाजहित को सर्वोपरि मानते हुए अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक उत्थान को समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि पूज्य तन सिंह जी का जीवन संदेश केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। वे एक प्रख्यात साहित्यकार भी थे, जिन्होंने 14 पुस्तकों और अनेक आलेखों के माध्यम से अपने विचार समाज तक पहुंचाए। नगर पालिका अध्यक्ष, दो बार विधायक, नेता प्रतिपक्ष और दो बार सांसद जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी उन्होंने सदैव समाजसेवा को प्राथमिकता दी।

कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक राजपूत सरदारों और मातृशक्ति की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। बड़ी संख्या में क्षत्रियों का एक साथ उपस्थित होना इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप देता नजर आया। समापन अवसर पर यह कार्यक्रम समाज में संगठन, विचार और प्रेरणा की सशक्त धरोहर के रूप में याद किया गया, जिसने पूज्य तन सिंह जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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