जयनगर में शिक्षकों का महाकुंभ: स्वामी विवेकानंद के पदचिह्नों पर चलने का लिया संकल्प
जयनगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) द्वारा 'कर्तव्य बोध दिवस' संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य इन्द्र देव शर्मा और हमीर सिंह राजपूत की उपस्थिति में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और शिक्षक समाज की अहम भूमिका पर चर्चा हुई। बेगूं क्षेत्र के शिक्षकों ने इस बौद्धिक समागम में भाग लेकर राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया।

जयनगर (बेगूं)। शिक्षा की नगरी जयनगर में मंगलवार का सवेरा एक नई वैचारिक क्रांति का साक्षी बना, जब राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) की उपशाखा बेगूं के तत्वावधान में 'कर्तव्य बोध दिवस' संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में आयोजित इस बौद्धिक समागम ने न केवल शिक्षकों को उनके उत्तरदायित्वों का बोध कराया, बल्कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की महत्ता को भी नए आयाम दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के भव्य स्वागत के साथ हुआ, जहाँ उपशाखा अध्यक्ष गोपाल लाल धाकड़ एवं मंत्री मुकेश धाकड़ ने पधारे हुए सभी गणमान्य जनों का पारंपरिक रूप से उपरणा ओढ़ाकर अभिनंदन किया। यह आयोजन महज एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि शिक्षा जगत की उन चुनौतियों और संभावनाओं पर मंथन का मंच बना, जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य निर्धारित करती हैं।
संगोष्ठी की वैचारिक गहराई उस समय और प्रगाढ़ हो गई जब विशिष्ट अतिथि सागर मल पटवा ने कर्तव्य बोध दिवस की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके पीछे के उद्देश्यों को रेखांकित किया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए भंवर सिंह मुरलिया ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के अनछुए और प्रेरक प्रसंगों को साझा कर उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का संचार कर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे एक शिक्षक विवेकानंद के सिद्धांतों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और विद्यालय के प्रधानाचार्य इन्द्र देव शर्मा ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि कर्तव्य बोध दिवस की सार्थकता तभी है जब हम अपने व्यावसायिक दायित्वों को सेवा भाव से जोड़ें। उन्होंने शिक्षक समाज की भूमिका को राष्ट्र की रीढ़ बताते हुए सभी को निष्ठा के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे सागर मल पटवा एवं भंवर सिंह मुरलिया ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हमीर सिंह राजपूत ने अपने उद्बोधन में संगठन की एकजुटता और शिक्षकों के हितों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के संतुलन पर जोर दिया। अंत में हमीर सिंह राजपूत एवं नंदलाल कुमावत ने समारोह में पधारे सभी अतिथियों, विद्वान शिक्षक-शिक्षिकाओं और सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस पूरे गरिमामय कार्यक्रम का कुशल संचालन शिवराज गोस्वामी एवं उपशाखा मंत्री मुकेश कुमार धाकड़ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस संगोष्ठी ने जयनगर के शैक्षणिक वातावरण में कर्तव्यनिष्ठा की एक नई अलख जगा दी है, जिसका प्रभाव दूरगामी सिद्ध होगा।

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