दो दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण का सफल समापन, ग्रामीण पशुपालन को मिली नई दिशा
डूंगला के बोजूँदा पशु अनुसंधान केंद्र में आईटीसी मिशन सुनहरा कल और गायत्री सेवा संस्थान के सहयोग से क्लाइमेट स्मार्ट विलेज परियोजना के तहत दो दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण का समापन हुआ। प्रशिक्षण में पशुपालन, वैक्सीनेशन, दुग्ध उत्पादन, एनएलएम और मंगल बीमा योजना की जानकारी दी गई।

डूंगला क्षेत्र में ग्रामीण आजीविका और पशुपालन सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आईटीसी मिशन सुनहरा कल और गायत्री सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफल समापन हुआ। क्लाइमेट स्मार्ट विलेज परियोजना के अंतर्गत पशु अनुसंधान केंद्र, बोजूँदा में आयोजित इस प्रशिक्षण ने ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के वैज्ञानिक और व्यावसायिक पहलुओं से जोड़ने का प्रभावी प्रयास किया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस, 23 तारीख को पशु अनुसंधान केंद्र के इंचार्ज डॉ. आर. के. नागदा ने पशु सखियों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों, पशुओं को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के उपायों, वैज्ञानिक पोषण एवं आहार प्रबंधन, पशु आवास की उचित व्यवस्था तथा पशुओं की सामान्य देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने पशुपालन को एक लाभकारी पशु उद्यम के रूप में अपनाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिससे ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना को बल मिला।
द्वितीय दिवस, 24 तारीख को पशुधन सहायक ईश्वर सिंह जी द्वारा डीवार्मिंग प्रक्रिया तथा पशुओं में पाई जाने वाली सामान्य बीमारियों के उपचार संबंधी व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस दौरान पशु सखियों को गोटरी फार्म का भ्रमण भी करवाया गया, जहां घाव की सफाई, वैक्सीनेशन जैसी प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान पशु सखी आशा जी सुथार और सुमित्रा जी ने स्वयं वैक्सीनेशन कर इस कार्यक्रम को व्यावहारिक रूप से सार्थक बनाया।
कार्यक्रम में पशु विज्ञान केंद्र के इंचार्ज डॉ. मुकेश चंद्र जी शर्मा ने पशुपालन व्यवसाय में भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) और मंगल बीमा योजना की जानकारी देकर सरकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट यूनिट का अवलोकन भी करवाया गया, जिससे जैविक खाद निर्माण और सतत कृषि के महत्व को रेखांकित किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में गायत्री सेवा संस्थान की ओर से प्रोजेक्ट हेड मीनल पाटनी, किशोर रेड्डी, पूनम दूधवाला और सूरज जटिया की सक्रिय उपस्थिति रही। विभिन्न गांवों से कुल 21 पशु सखियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लेकर पशुपालन के क्षेत्र में अपने ज्ञान और कौशल को नई दिशा दी।
कार्यक्रम का समापन ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक पशुपालन के माध्यम से सशक्त बनाने और क्लाइमेट स्मार्ट विलेज की अवधारणा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
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