चेची गांव में आवारा कुत्तों का आतंक, बछड़ों पर हमला कर उतारा मौत के घाट
बेगूं क्षेत्र के चेची गांव में हिंसक कुत्तों ने जगदीश धाकड़ और बाबूलाल धाकड़ के बछड़ों को बनाया निशाना, पशुपालकों ने प्रशासन से की नियंत्रण की मांग।

बेगूं क्षेत्र के चेची गांव में सोमवार सुबह आवारा कुत्तों के हमले में मृत गाय के बछड़े के पास एकत्र होकर आक्रोश जताते स्थानीय ग्रामीण और पशुपालक।
बेगूं। क्षेत्र के चेची गांव में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर पहुंच गया है, जिससे संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र और विशेषकर पशुपालक गहरे भय के साये में जीने को मजबूर हैं। हिंसक हो चुके इन आवारा कुत्तों द्वारा आए दिन गाय और भैंस के बछड़ों को निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और दहशत व्याप्त है। इसी क्रम में सोमवार सुबह कुत्तों के जानलेवा हमले में एक गाय के बछड़े की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा बछड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटनाक्रम के अनुसार, सोमवार सुबह जब स्थानीय किसान जगदीश धाकड़ अपने मवेशियों के बाड़े में पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। बाड़े के भीतर कई हिंसक कुत्ते मिलकर उनकी गाय के बछड़े पर जानलेवा हमला कर रहे थे। जगदीश धाकड़ ने तुरंत शोर मचाया और अन्य ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद एक बछड़े को कुत्तों के चंगुल से सुरक्षित बचाया, परंतु तब तक दूसरे बछड़े ने घावों के कारण मौके पर ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि चेची गांव में इस प्रकार की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाएं पिछले कई दिनों से लगातार सामने आ रही हैं। इससे पूर्व, करीब चार-पांच दिन पहले भी गांव के ही बाबूलाल धाकड़ की गाय के बछड़े पर कुत्तों ने बर्बर हमला कर दिया था, जिसके चलते उस बछड़े की भी मौत हो गई थी। इस सिलसिलेवार आतंक का शिकार केवल यही पशुपालक नहीं हुए हैं, बल्कि इससे पहले भी बालकिशन धाकड़, बाबूलाल धाकड़ और राधेश्याम साहू सहित कई अन्य ग्रामीणों के गाय एवं भैंस के बछड़ों पर ये आवारा कुत्ते हमला कर चुके हैं। इन लगातार हो रहे हमलों में कई मूक पशु गंभीर रूप से घायल हुए हैं, तो कई मासूम बछड़ों की जान जा चुकी है।
बार-बार होने वाले इन हमलों से त्रस्त और आक्रोशित ग्रामीणों ने अब स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभाग से इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि बेकाबू और हिंसक हो चुके आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर शीघ्र अति शीघ्र प्रभावी नियंत्रण पाया जाए, ताकि क्षेत्र के पशुपालकों को इस भारी जान-माल के नुकसान से राहत मिल सके और गांव में शांति का माहौल बहाल हो सके।

