आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम: चित्तौड़गढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं के हुनर को मिले प्रमाण पत्र
चित्तौड़गढ़ में भारत विकास परिषद के सिलाई एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र ने 25 महिलाओं को दक्ष होने पर प्रमाण पत्र वितरित किए। वर्ष 2018 से संचालित इस केंद्र ने अब तक 2023 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। स्वर्गीय नारायणलाल दोसी की स्मृति में दो मशीनें भी भेंट की गईं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में चित्तौड़गढ़ की इस प्रेरणादायी उपलब्धि की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

चित्तौड़गढ़। नारी शक्ति जब कौशल और आत्मविश्वास से लैस होती है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज की उन्नति का आधार बनती है। कुछ इसी संकल्प के साथ चित्तौड़गढ़ में 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को धरातल पर उतारा जा रहा है। भारत विकास परिषद के तत्वावधान में संचालित सिलाई एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र पर हाल ही में एक गरिमामयी समारोह आयोजित किया गया, जहाँ सिलाई कला में पारंगत हुई 25 बालिकाओं और महिलाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह केंद्र केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए शशी सनाढ्य ने गर्व के साथ साझा किया कि यह सेवा प्रकल्प वर्ष 2018 से अनवरत जारी है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र ने अब तक कुल 2023 बालिकाओं और महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया है। केंद्र की यह विशेषता है कि यहाँ कम से कम तीन माह का सघन प्रशिक्षण पूर्ण कर पूर्णतः दक्ष होने वाली प्रशिक्षणार्थियों को ही आधिकारिक प्रमाण पत्र दिया जाता है, जो उनके पेशेवर कौशल की पुष्टि करता है।
समारोह में सेवा और समर्पण का एक अनूठा संगम तब देखने को मिला जब अरूणा सुखवाल ने मयंक दोसी और गोपाल दोसी के अनुकरणीय योगदान का उल्लेख किया। दोनों भाइयों ने अपने पूज्य पिता स्वर्गीय नारायणलाल दोसी की पुण्य स्मृति में 'आत्मनिर्भर भारत' प्रकल्प को दो नई सिलाई मशीनें भेंट कीं। मुख्य अतिथि कमल जैन, बालकिशन धूत और नवीन वर्डिया ने ये मशीनें केंद्र व्यवस्थापिका को सौंपी, जिससे केंद्र की कार्यक्षमता में और वृद्धि होगी। इस पुनीत कार्य की सभी उपस्थित गणमान्यों ने मुक्तकंठ से सराहना की।
इस अवसर पर समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों जिनमें राजेश खण्डेलवाल, राजेश पगारिया, मनोहर मूंदडा, सीपी सुखवाल, अंजु पगारिया, स्नेहलता मून्दडा और संगीता जैन शामिल थे, ने अतिथियों और प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह था जब टीना और प्रियंका सहित कई प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह इस केंद्र ने उनके भीतर के डर को आत्मविश्वास में बदला और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का मार्ग दिखाया। अंत में, राकेश शर्मा ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। यह आयोजन चित्तौड़गढ़ में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर साबित हुआ है, जो दर्शाता है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें तो भारत की बेटियां आत्मनिर्भरता के शिखर को छू सकती हैं।

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