ग्रीन अर्थ नेचुरल सोसायटी, निंबाहेड़ा के सदस्यों ने चित्तौड़गढ़ के मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर सीता माता वन्य जीव अभ्यारण्य में प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में आयोजित होने वाले मेले से वन्यजीवों एवं पारिस्थितिकीय तंत्र को हो रही क्षति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोसायटी ने आग्रह किया है कि इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श कर उचित समाधान निकाला जाए, ताकि अभ्यारण्य की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में इस मेले में केवल पैदल आने वाला जनसमुदाय भाग लेता था, लेकिन वन क्षेत्र में मार्ग, पुल आदि के निर्माण के बाद वाहनों की आवाजाही और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी बढ़ गई है। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुंच रही है।

इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि मेले के दौरान पॉलिथीन और अन्य कचरा लोगों द्वारा वहीं छोड़ दिया जाता है, जिससे वन्यजीवों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सोसायटी ने इस स्थिति पर वन विभाग और जनप्रतिनिधियों से समय रहते ठोस कार्रवाई करने की अपील की है।

इस संबंध में आयोजित बैठक में इंजीनियर हजारीलाल, समिति अध्यक्ष चंद्र प्रकाश जोशी, सचिव राधेश्याम धाकड़, शकील लाल धाकड़, सूरज सेन, अजय धाकड़, कनेरा, निर्भय राम धाकड़ सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

अभ्यारण्य में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और कचरा प्रबंधन की समस्या को लेकर उठी यह मांग पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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