चित्तौड़गढ़ में बंगाली समाज की महिलाओं ने निभाई 450 साल पुरानी सिंदूर खेला परंपरा, नम आंखों से दी मां दुर्गा को विदाई
चित्तौड़गढ़ के चामटी खेड़ा चौराहे पर पांच दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन बंगाली समाज की महिलाओं ने देवी बोरोन और सिंदूर खेला की परंपरा निभाई।

चित्तौड़गढ़ के चामटी खेड़ा चौराहे के पास दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन विजयादशमी पर सिंदूर खेला की रस्म निभाती बंगाली समाज की महिलाएं।
चित्तौड़गढ़ में विजयादशमी के अवसर पर बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास के साथ सिंदूर खेला की रस्म निभाई। चामटी खेड़ा चौराहे के पास पिछले पांच दिनों से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन पूजा पंडाल में सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने मां दुर्गा को विदाई देने से पहले विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अगले साल फिर आने का निमंत्रण दिया।
विजयादशमी पर देवी बोरोन की विशेष रस्म निभाई गई। इसके लिए थाली में सुपारी, पान का पत्ता, सिंदूर, अगरबत्ती, आलता और मिठाइयां सजाई गईं। महिलाओं ने इन सामग्रियों के साथ मां दुर्गा के चेहरे को स्पर्श किया। इसके बाद मां को सिंदूर अर्पित कर पान, मिठाई और बताशे का भोग लगाया गया। मां को सिंदूर चढ़ाने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने अपने परिवारों की सुख-समृद्धि और उत्तम जीवन की कामना की।
पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूजा स्थल पर समूह में नृत्य किया। दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन धुनुची डांस का भी विशेष आयोजन हुआ। मिट्टी के विशेष पात्र में सूखे नारियल के छिलके और कपूर जलाकर मां दुर्गा की आरती की गई। ढाक-ढोल की गूंज के बीच भक्तों ने धुनुची के साथ विभिन्न करतब दिखाते हुए नृत्य किया।
मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं और पांच दिनों तक यहां निवास करने के बाद विजयादशमी पर वापस कैलाश लौट जाती हैं। बंगाली समाज में सिंदूर खेला की परंपरा करीब 450 साल पुरानी मानी जाती है। यह रस्म मां दुर्गा की विदाई का प्रतीक होने के साथ ही महिलाओं के बीच आपसी जुड़ाव, भाईचारे और सौभाग्य की शुभकामनाओं का अनूठा उत्सव भी है।
मां दुर्गा के विसर्जन से पहले पूजा पंडाल में विशेष आरती की गई। महिलाओं और समाज के अन्य लोगों ने मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को नमन किया। इस दौरान पूरा पंडाल ‘मां, अगले वर्ष फिर आना’ के जयकारों और ढाक-ढोल की थाप से गूंज उठा। बंगाली समाज के लोगों ने नम आंखों और भारी मन से मां दुर्गा को विदाई दी तथा अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया। सिंदूर खेला की रस्म और सामूहिक आरती के साथ चित्तौड़गढ़ में पांच दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन हुआ।

Piyush Mundara, Chittorgarh
नाम: पियूष मूंदड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
अनुभव: साल 2013 से
विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग
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शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
