चित्तौड़गढ़ में सिंधु गौरव यात्रा का आगमन, सिंधी संस्कृति के संरक्षण पर जोर
sindhu-gaurav-yatra-chittorgarh-culture-promotion

चित्तौड़गढ़। सिंधी भाषा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अलख जगाने के उद्देश्य से आयोजित 'सिंधु गौरव यात्रा' का चित्तौड़गढ़ आगमन पर भव्य और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। पूज्य सिंधी पंचायत विकास समिति और झुलेलाल युवा सेवा समिति के संयुक्त तत्वाधान में, राजस्थान सिंधी अकादमी तथा राजस्थान कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से भारतीय सिंधु सभा राजस्थान प्रन्यास द्वारा आयोजित इस यात्रा का नगर में पहुंचने पर समाजबंधुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया।
स्थानीय सिंधु कम्युनिटी हॉल में आयोजित संगोष्ठी में भारतीय सिंधु सभा के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर मोरवानी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष योगेश भोजवानी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में गौरव यात्रा के सह-संयोजक प्रदीप गेहानी, भारतीय सिंधु सभा की प्रदेश महिला उपाध्यक्ष वंदना वजिरानी, जिलाध्यक्ष जोधराज तनवानी, झुलेलाल युवा सेवा समिति के अध्यक्ष जेकी आहुजा, कमलेश खटवानी, आशा आहुजा, लीला वंगानी और शारदा विधानी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाल संस्कार शिविर की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सिंधी स्वागत गीत और भजनों के साथ हुआ। अतिथियों ने शिविर का सूक्ष्म अवलोकन किया और शिक्षिका कविता खटवानी व डॉ. लाजवंती छतवानी से शिविर की गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान किया कि वे सिंधी भाषा को केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने करियर के रूप में अपनाएं ताकि संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का सफल संचालन कमल चंचलानी और शंकर वंगानी ने किया। इस अवसर पर वासुदेव भोजवानी, चंद्र कुमार मालानी, हीरा मंगलानी, चंद्रभान कृपलानी, कमलेश शर्मा, रवि मालानी, राजेश तुलवानी, शंकर वंगानी, मोहन वजिरानी, चंद्रशेखर परियानी, सागर नैनानी, ज्योति प्रकाश चिमनानी, आशा तनवानी, तुलसी नैनवानी, माया सोनी, मीना चिमनानी, कोमल तुलसानी, कशीश तारवानी, मुस्कान सोनी, मनीषा आसवानी और सीता चांदवानी सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह गौरव यात्रा सिंधी समुदाय के सांस्कृतिक गौरव को अक्षुण्ण बनाए रखने और भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

