धर्म शास्त्र जीवन जीना सिखाते हैं, शिव प्रसाद का महत्व बताया संत दिग्विजयराम महाराज ने
चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी स्थित रामद्वारा में शिव पुराण कथा के दौरान संत दिग्विजय राम महाराज ने शिव प्रसाद, चरणामृत, बिल्व पत्र और पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व बताया। कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

तस्वीर में संत दिग्विजय राम महाराज चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में आयोजित शिव पुराण कथा के दौरान प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।
चित्तौड़गढ़/बड़ी सादड़ी। धर्म शास्त्र मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। शास्त्रों में जल का प्रयोग मितव्ययिता के साथ करने और इसके दुरुपयोग से बचने की बात कही गई है। भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है और जो भक्त पूरे भाव के साथ शिव प्रसाद ग्रहण करता है, उसे करोड़ों पुण्य प्राप्त होते हैं।
रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत आयोजित शिव पुराण कथा वाचन में संत दिग्विजय राम महाराज ने यह बात कही। उन्होंने भगवान शिव के प्रसाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो भक्त पवित्रता के साथ शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करता है, उसे शिव लोक की प्राप्ति होती है। प्रसाद का आधा कण भी सुख देने वाला और सभी प्रकार के विघ्न हरने वाला होता है। प्रसाद के साथ भक्ति का भाव जुड़ा होता है और प्रसाद कभी अकेले नहीं खाना चाहिए। भक्ति से भाव परिवर्तित हो जाते हैं।
संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि भगवान के अभिषेक में काम लिया गया जल चरणामृत बन जाता है। भगवान शिव के अभिषेक का चरणामृत जो तीन बार भक्ति भाव के साथ ग्रहण करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं। जिस घर में नैवेद्य प्रसाद के रूप में आता है, वह घर पवित्र हो जाता है। प्रसाद का तिरस्कार करने वाला महापाप का भागी बन जाता है।
उन्होंने कहा कि बिल्व पत्र को महादेव का स्वरूप माना गया है। उन्होंने ही बिल्व पत्र को स्थापित किया था। सभी तीर्थ बिल्व पत्र के मूल में निवास करते हैं। जो साधक बिल्व वृक्ष के मूल में प्रणाम करके पार्थिव शिवलिंग का पूजन करता है, उसे सभी तीर्थों का फल मिलता है। बिल्व वृक्ष के मूल में दीप प्रज्वलित कर उसका पूजन करने वाले को शिव लोक की प्राप्ति होती है और उसकी संतान सुखी रहती है।
संत ने कहा कि बिल्व वृक्ष के नीचे शिव भक्त को भोजन करवाने वाले को करोड़ों लोगों को भोजन कराने का फल प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भस्म, त्रिपुण्ड, रुद्राक्ष और बिल्व पत्र के बिना शिवलिंग का पूजन नहीं करना चाहिए।
शिव पुराण का उल्लेख करते हुए संत दिग्विजय राम महाराज ने बताया कि विद्या प्राप्ति की कामना के लिए एक हजार पार्थिव शिवलिंग, धन प्राप्ति के लिए आठ सौ, पुत्र की कामना के लिए डेढ़ हजार पार्थिव शिवलिंग, मोक्ष के लिए एक करोड़ और दरिद्रता समाप्त करने के लिए पांच हजार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से वांछित मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पार्थिव शिवलिंग का पूजन सर्व दान, व्रत और तीर्थ के समान फल देने वाला होता है।
उन्होंने बताया कि शिवलिंग तीन प्रकार के होते हैं—उत्तम, मध्यम और अधम। चार अंगुल ऊंचा और देखने में सुंदर शिवलिंग उत्तम कहा गया है। इससे आधा मध्यम और इससे भी आधा अधम कहा गया है।
शिव पुराण कथा श्रवण के लिए रामद्वारा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चातुर्मासिक सत्संग के तहत कथा में भगवान शिव के प्रसाद, बिल्व पत्र और पार्थिव शिवलिंग पूजन के महत्व पर श्रद्धालुओं को विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

Pradeep Vaishnav, Chittorgarh
नाम: प्रदीप वैष्णव
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: बड़ी सादड़ी तहसील
अनुभव: 26 साल (सन 2000 से 'प्रातःकाल' के साथ कार्यरत)
परिचय
प्रदीप वैष्णव बड़ी सादड़ी तहसील क्षेत्र के एक अनुभवी पत्रकार हैं। वह स्थानीय समाचारों, सामाजिक गतिविधियों, शिक्षा और क्राइम रिपोर्टिंग के क्षेत्रों में मुख्य रूप से सक्रिय हैं। वह सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रखते हैं। तथ्यात्मक और सरल रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देना तथा जनहित से संबंधित विषयों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।
बीट और विशेषज्ञता
- स्थानीय समाचार: बड़ी सादड़ी तहसील और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय व सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग।
- क्राइम: क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और अपराध से जुड़े मामलों की कवरेज।
- शिक्षा: शैक्षणिक गतिविधियां, विद्यार्थियों से जुड़े विषय और शिक्षा संबंधी समाचार।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
B.A. जर्नलिज्म (पत्रकारिता में स्नातक)
