चित्तौड़गढ़ के शंभूपुरा में गुरु जैन दिवाकर स्तंभ का लोकार्पण
मालव सिंहनी गुरुणी कमलावती म.सा. के जन्म शताब्दी वर्ष पर शंभूपुरा सावा मार्ग पर भव्य धार्मिक आयोजन और गुरु स्तंभ का अनावरण।

चित्तौड़गढ़ के शंभूपुरा में गुरु जैन दिवाकर स्तंभ के लोकार्पण अवसर पर उपस्थित जैन साध्वियां, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य नागरिक।
चित्तौड़गढ़ के शंभूपुरा में मालव सिंहनी गुरुणी कमलावती म.सा. के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुरु जैन दिवाकर स्तंभ का लोकार्पण श्रद्धा और आध्यात्मिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। शंभूपुरा सावा मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक सहभागिता का अद्वितीय समन्वय देखने को मिला।
लोकार्पण समारोह आराधिका डॉ. कुमुदलता, स्वर साम्राज्ञी डॉ. महाप्रज्ञ, वास्तुशिल्पी डॉ. पद्मकीर्ति और विद्याभिलाषी राजकीर्ति के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सांसद सी पी जोशी और विधायक चंद्रभानसिंह आक्या के शुभ संदेशों ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। कार्यक्रम में श्रमण संघ अध्यक्ष किरण डांगी, राजेश सेठिया, सुधीर जैन, सुनील बोहरा, पवन खटोड़, कमलेश ढेलावत, आनंद सालेचा, विकास भड़कत्या, कमलेश दूगड़, हिमांशु मारू, बलवंत बाघमार, अभय नाहर, शैलेंद्र झंवर सहित शंभूपुरा जैन समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
समारोह में बाबूलाल डांगी, ललित भड़कत्या, रोशनलाल कोठारी, लोकेश कोठारी, राजकुमार सिंघवी, प्रशांत सिसोदिया, राकेश बडाला, राजकुमार जैन, प्रकाश जैन, दिलीप सुराना, मदनलाल सिंघवी, मनोहर जारोली, मुकेश सिंघवी, सज्जन सिंह लोढ़ा, शुभम भड़कत्या, नरेश नलवाया तथा शंभूपुरा महिला मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही। मुंबई, बिजयनगर, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा और सतखंडा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
गुरु जैन दिवाकर स्तंभ के समीप जैन मांगलिक चिन्ह स्वास्तिक को रंगोली से सजाया गया तथा कृत्रिम फूलों से आकर्षक सजावट की गई। तीन भागों में निर्मित इस स्तंभ के निचले भाग में जैन दिवाकर गुरुदेव चौथमल का जीवन परिचय अंकित है, साथ ही दो दिशाओं में नवकार महामंत्र उत्कीर्ण किया गया है। मध्य भाग में स्तंभ के नाम के साथ जैन चिन्ह और ‘परस्परोग्रह जीवानाम’ का संदेश अंकित किया गया है। ऊपरी भाग में गुरु जैन दिवाकर चौथमल का विशाल रेट्रोफिट चित्र चारों दिशाओं में स्थापित किया गया है, जो रात्रि में भी प्रकाशमान होकर दर्शनीय रहेगा।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि जैन समाज की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक एकता को भी सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है।

Pratahkal Bureau
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