बड़ी सादड़ी। सद्गुरु के वचन अनमोल होते हैं और उनका मूल्य संसार की किसी वस्तु से नहीं आंका जा सकता। जो श्रद्धालु सद्गुरु के वचनों को केवल सुनता ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में धारण कर उनके अनुसार चलता है, वही वास्तविक रूप से मुक्ति का अधिकारी बनता है। ऐसा व्यक्ति स्वयं का जीवन सफल बनाने के साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी सही दिशा प्रदान करता है।

ये उद्गार भीलवाड़ा से पधारे संत निरंकारी मिशन के निरंकारी ज्ञान प्रचार महात्मा श्री ग्यारसी लाल जी ने बड़ी सादड़ी स्थित संत निरंकारी सत्संग स्थल पर रात्रि में आयोजित सत्संग के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा कराई जा रही परमात्मा की जानकारी के बाद परमात्मा के साथ इकमिक होने की भावना ही आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। यह अवस्था सद्गुरु की कृपा, सत्संग, सेवा, सिमरन तथा गुरु मत के मार्ग पर निरंतर चलते रहने से प्राप्त होती है।

सत्संग के दौरान बाहर से आए महात्मा का स्वागत गोपाल लाल जाट, नंदलाल मोर्य, राधेश्याम, दिलीप आदि ने माला एवं दुपट्टा पहनाकर किया और आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भेरूलाल ने किया।

उक्त जानकारी संगत इंचार्ज राधेश्याम रेगर ने दी।

Pratahkal Newsroom

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