चित्तौड़गढ़: गुजरात सरकार के संस्कृत शिक्षा प्रकोष्ठ के राज्यमंत्री हिमांजय पालीवाल ने श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में आयोजित गीता ज्ञान गंगा पखवाड़ा के तहत व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि संस्कृत संभाषण केवल भाषा का अभ्यास नहीं, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति की मूल धरोहर है, जिसे संरक्षित और प्रचारित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यमंत्री पालीवाल ने विश्वविद्यालय के भ्रमण के दौरान श्री कल्याण गौशाला में गायों के कल्याण हेतु प्रदान की जा रही सुविधाओं और सुशाशन के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे विश्वविद्यालय के विकास और संस्कृत शिक्षा के प्रसार में सक्रिय योगदान दें।

राज्यमंत्री ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के निजी क्षेत्र द्वारा संस्कृत शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो संकल्पबद्ध होकर संस्कृत शिक्षा को उच्चतम स्तर पर ले जाने का प्रयास कर रहा है।

गीता ज्ञान गंगा पखवाड़ा के अंतर्गत विश्वविद्यालय में पिछले 15 दिनों से आयोजित व्याख्यान माला ने विद्वानों और विद्यार्थियों के बीच गहन ज्ञानवर्धक चर्चाओं को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मूंदड़ा ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के गणमान्यजन रचना शर्मा, नितिन गिल, डॉ. सुनील शर्मा, हेमंत मेघवाल सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता शर्मा ने किया, जबकि आभार व्यक्त करने का दायित्व राहुल कुमार सती ने निभाया।

इस आयोजन ने न केवल संस्कृत भाषा और साहित्य के महत्व को उजागर किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक सहयोग से कितनी सार्थक प्रगति की जा सकती है।

Pratahkal Bureau

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